ईरान, तुर्की और अरब देशों में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की उम्मीद लगाए बैठा है इस्राईल लेकिन क्या ज़ायोनी शासन इस हालत में है कि हालात का फ़ायदा उठाए?

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

इस्राईल को इस समय बड़ी उम्मीद हो गई है कि अरब देशों में दूसरी अरब स्प्रिंग शुरू होगी और ज़ायोनी शासन को अपने लक्ष्य साधने का मौक़ा मिल जाएगा। इस्राईल की कामना यह है कि कोरोना वायरस की महामारी के बाद अरब देशों में आंदोलन शुरू हो जाएं और हर तरफ़ अफ़रा तफ़री मच जाए। इस तरह के हालात में किसी भी अरब देश को इस्राईल पर ध्यान देने का मौक़ा नहीं मिलेगा।

इस्राईली टीकाकार और तेल अबीब युनिवर्सिटी के अधिकारी प्रोफ़ेसर इयाल ज़ीसर ने यसराईल हायोम नाम के अख़बार में अपना लेख प्रकाशित किया है जिसमें प्रोफ़ेसर ज़ीसर ने लिखा है कि सोशल मीडिया को अगर ग़ौर से देखा जाए तो अच्छी तरह समझा जा सकता है कि जैसे ही कोरोना वायरस की महामारी का प्रकोप कम होगा और अर्थ व्यवस्था पर इससे पड़ने वाले विनाशकारी प्रभाव सामने आएंगे निश्चित रूप से दूसरी अरब स्प्रिंग शुरू हो जाएगी जो पहली अरब स्प्रिंग से ज़्यादा तूफ़ानी होगी। ज़ीसर ने लिखा कि अरब देशों में आबादी का बड़ा भाग युवाओं पर आधारित है। इस्राईल में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी 16 प्रतिशत है मगर जार्डन, सीरिया और इराक़ में साठ साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी 6 प्रतिशत है। इन अरब देशों में अधिक संख्या 30 साल से कम उम्र के लोगों की है जिन्हें रोज़गार चाहिए।

अरब देशों की आबादी को सरकारों की ओर से दिए जा रहे आंकड़ों पर भरोसा नहीं है और उन्हें पता है कि इन सरकारों ने कोरोना का मुक़ाबला करने में बहुत घटिया रूप से काम किया है। अरब देशों में हेल्थ सेक्टर भी कमज़ोर है और वहां जानकारियों पर भी रोक लगी हुई है मगर आज के दौर में जानकारियों को छिपा पाना आसान  नहीं है। इस समय जैसे कोरोना वायरस हर तरफ़ फैल रहा है और कोई भी सरकार उसे रोक नहीं पा रही है उसी तरह जानकरियां भी तेज़ी से सारी दुनिया में फैल जाती हैं उन्हें छिपाना संभव नहीं होता।

यदि अरब जगत में सोशल मीडिया का जायज़ा लिया जाए तो यह यक़ीन हो जाता है कि जब कोरोना महामारी से उपजे राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक संकट सामने आएंगे तो पूरी अरब दुनिया में प्रदर्शन फूट पड़ेंगे। यही तुर्की और ईरान में भी होगा और यह इस्राईल के लिए अच्छा मौक़ा होगा।

इस्राईली प्रोफ़ेसर ने यह तसवीर तो पेश कर दी लेकिन वह अपने लेख में यह जायज़ा लेना भूल गए कि इस्राईल इस समय भयानक राजनैतिक संकट में फंसा हुआ है। इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे हुए हैं और कभी भी जेल जा सकते हैं। लेखक यह भी भूल गए कि इस्राईल हर तरफ़ से इस तरह घिरा हुआ है कि उसके लिए सांस लेना कठिन हो गया है। फ़िलिस्तीनी संगठनों, हिज़्बुल्लाह, सीरिया, इराक़, यमन और ईरान की बढ़ती ताक़त को देखकर इस्राईल को यह डर है कि उसका ग़ैर क़ानूनी वजूद ज़्यादा दिन बाक़ी नहीं रह पाएगा।

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