बंदियों की निगरानी में पुलिसकर्मियों के दामन पर पहले भी लगते रहे लापरवाही के दाग…  जिला अस्पताल से दरोगा की मां का हत्यारोपी भागने का नया मामला नही है।

मुकीम अहमद अंसारी

कई मामलों में पुलिसकर्मियों पर लापरवाही के मुकदमे भी लिखे गए

बदायूं। जिला अस्पताल से दरोगा की मां का हत्यारोपी भागने का मामला नया नहीं है।यहां बंदियों की सुरक्षा में लगे पुलिस कर्मियों के दामन पर पहले भी लापरवाही के दाग लगे हैं।यहां जेल से लाए गए बंदी ने कभी पुलिस कस्टडी में आत्महत्या कर ली तो कभी शहर में डबल मर्डर की वारदात को अंजाम देकर जमीन हड़पने समेत माहौल बिगाड़ने की साजिश तक कर डाली।इन मामलों में पुलिसकर्मियों पर लापरवाही के मुकदमे भी लिखे गए लेकिन उन फजीहतों से महकमे के अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक किसी ने सबक नहीं लिया।साल 2013 में मरहूम हिस्ट्रीशीटर नईम उर्फ राजा जेल से खुद को बीमार बताकर जिला अस्पताल में शिफ्ट हुआ था।
यहां उसने सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों से सेटिंग की और एक को अपनी गाड़ी से मथुरा-वृंदावन घूमने भेजा तो दूसरे की भी व्यक्तिगत इच्छाएं पूरी कीं।इसके बाद नईम अस्पताल से रात के वक्त घूमने के बहाने निकलने लगा। जबकि इसी बीच उसने शहर के मोहल्ला खंडसारी निवासी बुजुर्ग रामगोपाल और उनकी बुजुर्ग बहन शांतिदेवी की घर में घुसकर हत्या कर दी। बाद में अस्पताल में आकर लेट गया और तीसरे दिन यहां से डिस्चार्ज होकर जेल चला गया। घटनास्थल पर नईम अपने विरोधी गुट के युवक का फोटो पहचान पत्र फेंक आया था। घटनाक्रम के तीन उद्देश्य पुलिस जांच में सामने आए थे, पहला बुजुर्ग भाई बहन का मकान कब्जाना, दूसरा दीपावली की रात को ऐसी वारदात करके शहर का माहौल बिगाड़ना और तीसरा फोटो पहचान पत्र मौके पर फेंककर विरोधी को फंसाना।
हालांकि पुलिस ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया और उसके भाई फईम समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया। इस मामले में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई थी। फिरासत ने लगा ली फांसी थाना कुंवरगांव इलाके के भैंसामई गांव में रहने वाला हिस्ट्रीशीटर फिरासत में बेहद शातिर था। एनकाउंटर के बाद फिरासत को साल 2012 में पुलिस पकड़ सकी लेकिन उसे जेल में रहना गंवारा नहीं था।नतीजतन उसे जेल में कहीं से एक सुई पड़ी मिली थी, इस सुई को घोंपकर उसने अपने पेट में डाल लिया था।जेल प्रशासन ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया तो दूसरे दिन आपरेशन की बात डाक्टर्स ने कही।फिरासत पर पुलिस का पहरा कड़ा था,ऐसे में उसने खुद को ओढ़ी हुई चादर से रातभर में चोरी-छिपे एक चीर फाड़ ली।उसे लेकर वाशरूम में गया और वहीं उसी चीर का फंदा बनाकर फांसी लगा ली थी।इस मामले में भी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई। हवालात में लगाई थी फांसी साल 2015 में एसओजी टीम द्धारा पकड़े गए एक शातिर को टीम ने इस्लामनगर थाने की हवालात में रखा था। सर्दी का मौसम था और वहां कंबलों का एक ढेर बंदियों को रखा गया था।शातिर बंदी ने कंबल से चीर फाड़कर हवालात में उसी से फांसी लगा ली थी।इस मामले में थानेदार से लेकर नाइट ड्यूटी स्टाफ और संतरी पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
सुमित का भी नहीं लगा सुराग जिला जेल से भी एक बंदी सुमित साल 2018 में फरार हो चुका है।मुरादाबाद का रहने वाला सुमित यहां प्रशासनिक आधार पर शिफ्ट किया गया था लेकिन वो सुनयोजित ढंग से जेल की चाहरदीवारी लांघकर भाग गया।उसके साथ गोरखपुर का कुख्यात अपराधी चंदन भी भागने का दम भरा था लेकिन ऐन वक्त पर उसे धर दबोचा गया था। सुमित पर अभी भी दो लाख का इनाम है।लेकिन पुलिस तो दूर एसटीएफ भी उसे नहीं पकड़ सकी है।

*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

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