सहसवान, बदायूँ। नगर और आस-पास के देहात क्षेत्रों में इन दिनों सरसों के तेल के नाम पर मिलावटी तेल की खुलेआम बिक्री हो रही है। बाजारों में जो चमकदार, पीला और महकदार तेल मिल रहा है, वह दिखने में भले ही असली सरसों का लगे, लेकिन इसमें पॉम ऑयल, राइस ब्रान और रासायनिक खुशबू की मिलावट की जा रही है। यह मिलावटी तेल न सिर्फ उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रहा है, बल्कि उनके स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहवाज़पुर, सैफुल्लाहगंज, मोहद्दीनपुर, पठानटोला समेत कई मोहल्लों और आस-पास के गांवों में यह तेल आसानी से उपलब्ध है। कई स्थानों पर यह तेल थोक में लाकर छोटी दुकानों और ठेलों पर सप्लाई किया जा रहा है। जानकारों की मानें तो सम्भल और चन्दौसी से सस्ता पॉम ऑयल और राइस ब्रान तेल मंगाकर यहां स्थानीय स्तर पर मिलावट की जाती है। इसके बाद रंग और खुशबू मिलाकर इसे शुद्ध सरसों के तेल के रूप में बेचा जाता है।
तेल माफिया इस काम से बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। जहां मिलावटी तेल की लागत ₹50-₹60 प्रति लीटर है, वहीं इसे शुद्ध सरसों के नाम पर ₹120 से ₹140 तक बेचा जा रहा है। उपभोक्ता अनजाने में नकली तेल खरीद रहे हैं और कीमत असली की चुका रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का तेल शरीर में धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों को जन्म देता है। इससे हृदय रोग, लीवर खराब होना, ब्लड प्रेशर की समस्या और कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय नागरिकों में इसको लेकर नाराज़गी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि पहले दूध, मिठाई और मसालों में मिलावट की शिकायतें आती थीं, अब तो रोजाना इस्तेमाल होने वाले तेल में भी मिलावट आम हो गई है। प्रशासन की चुप्पी से मिलावटखोरों के हौंसले बुलंद हैं।
अब सवाल उठता है कि जब यह सब जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आ रही है, तो फिर विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है।
*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

