वाट्सएप्प फेसबुक ने घर-घर पैदा कर दिए पत्रकार, सोशल मीडिया को भी संवैधानिक दायरे लाने की जरूरत है

मुकीम अहमद अंसारी

सहसवान, बदायूं। मीडिया को लोकतंत्र का चौथा अंग माना जाता है और लोकतंत्र में मीडिया सरकार और समाज के बीच दोहरे आइने का काम करने वाली मानी जाती है। प्रिंट मीडिया का इतिहास बहुत पुराना है जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का उदय आजादी के बहुत बाद हुआ है।
जब से प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उद्योगपतियों राजनेताओं का पदार्पण हुआ है तबसे मीडिया पर अंगुली उठने लगी है। लोग प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर दोषारोपण कर ही रहे थे कि इसी देश में सूचना क्रांति का दौर आ गया और सोशल मीडिया ने प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक दोनों को पीछे ढकेल दिया। इस समय सोशल मीडिया सब पर भारी पड़ने लगी है और इलेक्ट्रॉनिक चैनलों से भी जल्दी घटनाओं का पर्दाफाश सोशल मीडिया पर होने लगा है।
प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर तो सरकार का नियन्त्रण था लेकिन सोशल मीडिया पर किसी का भी नियन्त्रण नहीं रह गया है और उसकी स्थिति बिना नकेल साड़ जैसी हो गयी है। सोशल मीडिया ने गाँव गाँव घर घर ऐसे पत्रकार पैदा कर दिया है जिन्हें पत्रकारिता की परिभाषा व नियम कानून ही नहीं मालूम है। फलस्वरूप लोग मीडिया की खबरों पर बिना पुष्टि किये अब जल्दी विश्वास नहीं करते हैं। सोशल मीडिया से जहाँ तमाम फायदे हो रहे हैं तो वहीं ऐलोपैथी दवाओं की तरह साइड रियेक्शन भी हो रहे हैं। लोग इसका दुरुपयोग करने लगे है जिसके फलस्वरूप समाज पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ने लगा है।जिसके मन में जो आता है उसे वह सोशल मीडिया का हिस्सा बना देता है।
गलत और भ्रामक सोशल मीडिया की खबरों पर अब तक जगहों पर अमन चैन में खलल पड़ चुकी है।इधर सोशल मीडिया के सहारे कुछ साम्प्रदायिक शक्तियों को बल मिलने लगा है तथा वह भड़काऊ पोस्टिग कर लोगों को गुमराह व बदनाम करने लगे हैं।
सोशल पर कुछ लोगों ने जैसे व्यक्तिगत आक्षेप करने की मुहिम शुरू कर दी है और अब तक कई मुकदमें भी दर्ज हो चुके हैं।समय रहते अगर ऐसे असामाजिक तत्वों पर नकेल नहीं कसी गयी तो लोग सोशल मीडिया के कंधे पर बन्दूक रखकर साम्प्रदायिक आग फैलाकर हमारी कौमी एकता एव गंगा जमुनी तह्जीब को प्रभावित कर देंगे।
किसी भी व्यक्ति के बारे में असंसदीय शब्दों का प्रयोग करके और देश प्रदेश की अखंडता विरोधी मनमानी टिप्पणी करने वालों को कतई बख्शा नहीं जाना चाहिए।जिस तरह से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर नकेल लगाने की व्यवस्था है उसी तरह सोशल मीडिया को भी संवैधानिक दायरे लाने की जरूरत है।

*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

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