बदायूं।बिना कनेक्शन बिल जारी करने और वसूली के लिए आरसी जारी करने के मामले में न्यायालय ने सख्ती दिखाई है।न्यायालय ने पीड़ित की याचिका स्वीकार करते हुए सिविल लाइंस थानाध्यक्ष को विद्युत निगम के एक्सईएन,एसडीओ समेत चार अधिकारियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।
मेंहदी हसन ने प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया था कि 15 जुलाई 2023 को उनके पुत्र मोहम्मद तस्लीम के मोबाइल पर विद्युत निगम की ओर से 8007 रुपये का बिल भेजा गया।बिल डाउनलोड करने पर पता चला कि उनके नाम से 2022 में एक ट्यूबवेल का कनेक्शन दिखाया गया है,जिसके लिए उन्होंने कभी आवेदन भी नहीं किया।
आरोप है कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता आरएन वर्मा,एसडीओ विक्रांत सैनी,जेई सतीश कुमार और मीटर रीडर ने कूटरचित दस्तावेज बनाकर फर्जी कनेक्शन दर्शा दिया।आरोप लगाया कि बिल भेजकर वसूली मांगी। विरोध करने पर फर्जी आरसी जारी करने और बिजली चोरी के मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
पीड़ित ने थाने और एसएसपी से शिकायत की,लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।उधर सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तौसीफ रजा की न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है।यदि कनेक्शन था ही नहीं तो बिल क्यों जारी हुए,इसकी जांच जरूरी है।कोर्ट ने थानाध्यक्ष को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया है।
*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

