ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगे तो राष्ट्र संघ का वजूद ही ख़तरे में पड़ जाएगा, ट्रम्प यही चाहते हैं

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

फ़ॉरेन पॉलेसी में शनिवार को प्रकाशित हुए एक लेख में कीथ जॉनसन ने लिखा है कि ट्रम्प प्रशासन अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव 2020 से पहले ईरान परमाणु समझौते को पूरी तरह से ख़त्म करने की कोशिश में है, ताकि आने वाली सरकार इसे पुनर्जीवित न करसके।

कीथ के अनुसार, अमरीका और ईरान परमाणु समझौते में शामिल बाक़ी पक्षों के बीच लड़ाई तेज़ हो गई है, जो न केवल सिर्फ़ इस समझौते को प्रभावित करेगी, बल्कि इससे राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद का अस्तित्व ही ख़तरे में पड़ गया है।2015 में ईरान और विश्व की छः बड़ी शक्तियों के बीच हुए परमाणु समझौते से 2018 में एकपक्षीय रूप से निकलने के दो साल बाद, ट्रम्प प्रशासन इसे पूरी तरह से ख़त्म करना चाहता है। वाशिंगटन की पूरी कोशिश है कि वह किसी भी क़ीमत पर संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ लगाए गए हथियारों के प्रतिबंधों की अवधि में वृद्धि कर सके, जो इसी साल अक्तूबर में समाप्त हो रही है

ट्रम्प प्रशासन धमकी दे रहा है कि वह ईरान के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र संघ के समझौते से पहले लगे सभी प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के लिए समझौते में मौजूद विवादित विकल्प स्नैपबैक का इस्तेमाल कर सकता है। इस धमकी से वाशिंगटन सीधे अपने यूरोपीय सहयोगियों और चीन और रूस के साथ टकराव की स्थिति में आ गया है, जो इस समझौते को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।इस हफ़्ते, समझौते में मौजूद पक्षों ने ट्रम्प प्रशासन के इन प्रयासों की निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि इस तरह से न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया संकट जन्म लेगा, बल्कि संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद का अस्तित्व ही ख़तरे में पड़ जाएगा।

मंगलवार को यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के प्रमुख जोसेप बोरेल ने वाशिंगटन पर हमला करते हुए कहाः वह 2015 के समझौते से निकल चुका है, लेकिन इसके बावजूद उसके भविष्य को लेकर किसी पक्ष की तरह बात कर रहा है। बोरेल ने ज़ोर देकर कहाः वे निकल चुके हैं। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि वे निकल चुके हैं।बुधवार को ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी समझौते में शामिल, तीन यूरोपीय देशों और चीन और रूस से कहा है कि वे इस समझौते को जड़ से ख़त्म करने के अमरीका के प्रयासों पर लगाम लगाएं, क्योंकि वह अब इस समझौते में शामिल नहीं है।

यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की समिति में ईरान मामलों की विशेषज्ञ एली गेरनमायाह का कहना है कि यह गंदा खेल कई महीनों से जारी है, लेकिन इसकी गंदगी अब लोगों के सामने आ रही है।ओबामा प्रशासन में ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों की डिज़ाइनिंग में भूमिका अदा करने वाले रिचर्ड नेफ़िव का कहना हैः जो लोग परमाणु समझौते को और संयुक्त राष्ट्र को पंसद नहीं करते हैं, उनके लिए एक ही तीर से दो शिकार करने का यह सुनहरा मौक़ा है। सबसे ख़राब स्थिति में समझौता ख़त्म हो जाएगा और संयुक्त राष्ट्र निष्क्रिय होकर रह जाएगा, जो ट्रम्प प्रशासन के दृष्टिकोण से कोई बुरा नहीं है।ईरान भी चेतावनी दे चुका है कि अगर उसके ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों में वृद्धि की गई तो वह न केवल परमाणु समझौते से निकल जाएगा, बल्कि 1970 की परमाणु अप्रसार संधि से भी बाहर निकल जाएगा।

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