पीएम मोदी के मेक इन इंडिया सपने को साकार कर रहे है युवा इंजीनियर चंचल सिंह यादव दावारू स्वदेशी निर्मित झालर और सजावट का समान क्वालिटी में चीनी उत्पाद से कई गुना बेहतर

शमीम अंसारी बाराबंकी: एसएम न्यूज24टाइम्स .

बाराबंकी। मिसाइल मैन के नाम से दुनिया में फेमस रह चुके विख्यात साइंटिस्ट व पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम हमेशा युवाओं को यह सन्देश देते रहते थे कि बुलंदी पर पहुँचना चाहते हो तो सपने देखों, और उन सपनों को हकीकत में बदलने के लिये उसी दिशा में बढ़ते जाओ।खो जाओ उस दुनिया में जहाँ आपके सपने साकार हो रहे हो।युवा देश की तस्वीर को बदलने की क्षमता रखते हैं। पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का यह प्रेरक सन्देश जिले की तहसील हैदरगढ़ के नेराकबूलपुर गांव के रहने वाले युवा चंचल सिंह यादव के दिमाग में बैठ गया। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को आदर्श मानने वाले युवा चंचल सिंह यादव ने पढ़ाई के दौरान ही यह संकल्प ले लिया था कि उन्हें देश के लिये कुछ करना है। देवा क्षेत्र में स्थित एमराल्ड 9 संस्थान से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद से ही इलेक्ट्रिकल क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण के साथ साथ ग्रामीणों को रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ने की मुहिम शुरू कर दी। बीते 3 वर्षो में ही सोलर एनर्जी और बिजली से जलने वाली सजावटी झालर सहित अन्य उत्पादों को बनाकर चीनी समान को चुनौती दे डाली।उसका दावा है कि उसके बनाये उत्पाद चीनी कंपनियों के उत्पादों से कई गुना क्वालिटी में बेहतर है और मूल्य भी अधिक नहीं है। चंचल सिंह यादव गांव-गांव जाकर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं, दिव्यांगों सहित बेरोजगार युवाओं को स्वदेशी सजावट झालर-लाइट व अन्य सामान बनाने की निःशुल्क ट्रेनिंग प्रदान कर रहें है। साथ में उनके द्वारा बनाये सस्ते और स्वदेशी समान को मार्केट में बेचने का प्लेटफार्म भी उपलब्ध करा रहें है। चंचल सिंह यादव बताते है इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद उनके पास जॉब के तमाम ऑफर आये लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया।उनका एक ही सपना है कि लोकप्रिय प्रधानमंत्री मोदी जी के मेकिंग इंडिया और स्वदेशी उत्पाद के सपनों को साकार करना और ग्रामीण भाई- बहनों को रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ना।डिप्लोमा करने के बाद से ही वह अपने सपनों को साकार करने में लग गए। वह युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये बीते 3 वर्षो से अपनी मुहिम चला रहे है। चंचल सिंह यादव बताते है कि उन्होंने बाराबंकी जिले के एमराल्ड9 संस्थान से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया था। धीरे-धीरे एक स्थान से शुरू हुआ काम कई जिलों में फैलने लगा।उनकी संस्था यंग इंडिया पावर सॉल्यूशन दिव्यांगों, युवाओं और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को निःशुल्क ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करने के साथ टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग व मार्केटिंग में भी सहयोग कर रही हैं।उनकी संस्था के माध्यम से अब तक लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव, झांसी, ललितपुर आदि जिलों के सैकड़ों लोगों को ट्रेनिंग देकर स्टार्ट भी कराया जा चुका है। आत्मनिर्भर भारत के लिए अभी वह चाइनीज सामानों का स्वदेशी विकल्प देने के लिए काम कर रहे हैं। उनके द्वारा एलईडी व सोलर के सजावटी स्वदेशी उत्पाद तैयार करवाए जा रहे हैं जिनको वह गांव-गांव में बनवाना चाहते हैं। दीवाली पर्व के लिए उनके द्वारा तैयार कराए जा रहे हैं स्वदेशी झालर वाटर प्रूफ व शॉक प्रूफ (पानी में जलने के साथ करंट भी नहीं मारती है) भी है। आत्मनिर्भर स्वरोजगार के लिए प्रतिदिन युवा उनसे मिलते रहते हैं।उनके द्वारा बांस कायोग करके आकर्षक सजावटी लाइट तैयार की जाती है जो किसी का भी मन मोह लेती है। उनके द्वारा स्वदेशी तकनीक से ग्रामीण क्षेत्र में मैन्युफैक्चरिंग रिंग को बढ़ावा देने पर भी कार्य किया जा रहा है।

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