अपने जीवन को अंधेरों से बचाना चाहते हो तो ईश्वर द्वारा  नियुक्त मार्ग दर्शक  का ही अनुशरण करो-मौ नक़ी अस्करी सिंघासन सिर्फ़  वरासत पर नहीं क़ाबिलियत व ज्ञान के आधार पर होनी चाहिये  वाक़ये करबला एक ऐसा सानेहा है जो चौदह सौ बरस बाद भी ताज़ा लगता है- अली अब्बास

मोहम्मद आमिर संवाददाता एसएम न्युज24 टाइम्स

बाराबंकी -।  इमामबाड़ा मीर मासूम अली कटरा में छठवीं  मजलिस को सम्बोधित  करते हुये मौलाना जाबिर  जौरासी  ने कहा संसार में शान्ती का संदेश फैला है  तो पैगंबर व उनकी संतानो के द्वारा। जिसने हर मज़हब व मिल्लत के लोगों के दिलों पर असर किया। इंसानियत का पैगाम देने  वाले, मोहम्मद (स अ व) के नवासे फातिमा ( स अ) के लाल का आज इसी लिए घर घर हो रहा  मातम। मौलाना गुलाम अस्करी हाल देवा रोड में छठवी मजलिस को सम्बोधित करते हुये  मौलाना नक़ी अस्करी  ने कहा अपने जीवन को अंधेरों से बचाना चाहते हो तो ईश्वर द्वारा  नियुक्त मार्ग दर्शक  का ही अनुशरण करो। जब आखरी इमाम आयेंगे संसार पाप मुक्त हो जायेगा।
लश्करे इमाम में  शामिल होना चाहते हैं तो दुआए  अहद को अमल में  लायें । आखिर में  करबला वालों के मसायब पेश किया जिसे सुनकर  अज़ादार रो पड़े । मजलिस से  पहले हाजी सरवर अली कर्बलाई  ने नज़रानये अक़ीदत पेश करते हुये कहा – तमाम अहले सितम और तमाम बानिये शर , हज़ारों  ख़ंजरों शमशीर  और  तेग़ो तबर । सितम ने छोड़ी नही करबला में कोई कसर ,नहीं था ख़ौफ़ कोई भी मगर तुम्हें सरवर । न ले सका कोइ बइयत हुसैन ज़िन्दाबाद , हर इक  सदी की ज़रूरत  हुसैन ज़िन्दाबाद । कटरा मोहल्ला स्थित आगा फ़ैयाज़ मियांजानी के अज़ाखाने में अपने निश्चित समय मजलिस शुरू हुई । यहाँ अली अब्बास साहब ने मजलिस को सम्बोधित  करते हुये कहा   वाक़ये करबला एक ऐसा सानेहा है जो चौदह सौ बरस बाद भी ताज़ा लगता है।सिंघासन सिर्फ़  वरासत पर नहीं क़ाबिलियत व ज्ञान के आधार पर होनी चाहिये सत्य की राह में जीवनदान देना ही असली जीवन है । रसूल पुर में मोहसिन साहब के अज़ाखाने में मौलाना तस्दीक़ हुसैन साहब ने करबला वालों का दु:ख प्रकट करते हुए कहा कि हुसैन का  सब्र देख कर देवगण  भी आश्चर्यचकित हो गए । कर्बला सिविल लाइन , अस्करी नगर ,अली कालोनी दयानंद नगर , करबला सिविल लाइन , बेगम गंज ,तकिया ,पीर बटावन,असद नगर ,देवां ,फतेहपुर , जैदपुर , असन्द्रा , मीरापुर , मोती पुर , रसूल पुर , जरगांवां , सरैयां  , मिर्चिया , टिकरिया , सन्गौरा  , केसरवा , मौथरी आदि गांवों  कस्बों में भी घर घर  मजलिसों  का सिलसिला शासनादेश के अनुसार जारी है ।
कोविड -19 के चलते इस वर्ष इमाम हुसैन (अ)का गम  सावधानियों के साथ मनाया जा रहा है  । हर तरफ़ या हुसैन या हुसैन की सदाएं गूंज रही है ।इमाम हुसैन (अ) के गम में हर मज़हब व मिल्लत के लोग शामिल है । मजलिस से पहले मुहिब रिज़वी,कलीम रिज़वी ,बाक़र नक़वी , सरवर अली कर्बलाई,मौलाना अली मेहदी , नदीम रिज़वी , सलीम,शबी अहमद आब्दी, मोहम्मद, अदनान रिजवी, नजफी , ज़ाकिर इमाम , अयान , गाज़ी इमाम आदि लोगों ने नज़रानये अक़ीदत पेश किया ।मजलिसों  का आरंभ  तिलावते कलाम पाक से किया गया ।

मोहम्मद आमिर संवाददाता एसएम न्युज24 टाइम्स

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