समाजवादियों ने हिन्दी आंदोलन को जीवंत बनाए रखा है : राजनाथ शर्मा
रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500
हिन्दी दिवस पर गांधी भवन में आयोजित हुई संगोष्ठी
बाराबंकी। हिन्दी आंदोलन और देशी भाषाओं को आम आदमी से जोड़ने का काम समाजवादियों ने किया। समाजवादियों ने ही हिन्दी आंदोलन को जीवंत बनाए रखा है। आजादी के बाद जो भारतीय नेतृत्व उभरा उनमें डा. राममनोहर लोहिया, मामा बालेश्वर दयाल, लाडली मोहन निगम सरीखे अधिकतर समाजवादी आन्दोलन से जुड़े लोगों ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाये जाने के पक्षधर थे। यह बात गांधी भवन में गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट के तत्वावधान में हिन्दी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कही। इस मौके पर हिन्दी आन्दोलन के नेता रहे स्व. सरदार बेअन्त सिंह की पत्नी वीरेन्द्र कौर को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। श्री शर्मा ने आगे कहा कि समाजवादी आन्दोलन से जुड़े लोग अंग्रेजी भाषा का पूरी तरह विरोध करते थे। यही नहीं वह सभी विदेशी वस्तुओं का भी पूरी तरह बहिष्कार करते थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के कारण लोकसभा में अंग्रेजी भाषा का चलन प्रारम्भ हुआ। लेकिन समाजवादी नेता डा. राममनोहर लोहिया के लोकसभा में पहुंचने के बाद लोकसभा से अंग्रेजी भाषा का प्रभाव कम हुआ और हिन्दी का प्रभाव बढता चला गया। इन 70 वर्षों में डा. लोहिया सहित राजनारायण, मधुलिमये, जार्ज फर्नाडिस, गौड मोराहारी, एसएम जोशी, गुणाकर मुले, वेद प्रताप वैदिक, मुलायम सिंह यादव, अबु आसिम आजमी, सरदार बेअन्त सिंह सहित कई समाजवादी नेता अवसर अवसर पर हिन्दी आन्दोलन से जुडे रहे। श्री शर्मा ने कहा कि जिस समय देश की आजादी का संघर्ष चल रहा था उसी समय भाषा के सवाल पर गांधी जी बडी तत्परता से संघर्षरत थे कि सम्पूर्ण देश की एक भाषा हो। उन्ही के प्रयास से दक्षिण भारत, उत्तर भारत, पूर्वात्तर भारत में हिन्दी प्रचारणी सभा, हिन्दी विकास सभा की स्थापना हुई। जब भी गांधी जी दौरे पर होते तो वह इन समितियों में अपनी उपस्थिति अवश्य दर्ज कराते थे। सबसे अधिक हिन्दी का विरोध तमिल और मद्रास राज्य में हुआ। तमिलनाडु के तत्कालीन राजनेता चक्रवर्ती राजगोपालाचारी जिन्होंने गांधी जी के साथ राष्ट्र भाषा हिन्दी का समर्थन किया। गांधी जी ने उसके जवाब में कहा कि किसी नीति और समय को देखते हुए राजगोपालाचारी समर्थन कर रहें हैं मुझे उन पर संदेह है। गांधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट भी इसी कड़ी में सम्मेलनों और गोष्ठियों के माध्यम से उच्च न्यायालय और सर्वाच्च न्यायालय में हिन्दी भाषा के साथ साथ क्षेत्रीय भाषाओं को लागू करने में प्रयासरत है। सभा का संचालन पाटेश्वरी प्रसाद ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से सरदार राजा सिंह, समाजसेवी अशोक शुक्ला, मृत्युंजय शर्मा, विनय कुमार सिंह, सत्यवान वर्मा, वासिक रफीक वारसी, साकेत मौर्या, संतोष शुक्ला, मनीष सिंह, रंजय शर्मा, उमानाथ यादव, नीरज दूबे, अशोक जायसवाल सहित कई लोग मौजूद रहे।
रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500

