कोरोना टीकाकरण अभियान अंतिम दौर में, मार्च में हो सकता है पूरा, पहले कराया जाएगा सिरो सर्वे, उसके बाद लिया जाएगा फैसला

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पिछले एक साल से चल रहा कोरोना के खिलाफ दुनिया का सबसे टीकाकरण अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और मार्च में इसका समापन हो सकता है। लेकिन कोई भी फैसला लेने के पहले सिरो सर्वे किया जाएगा, जिससे यह पता चलेगा कि तीसरी लहर के बाद और बड़े पैमाने पर टीकाकरण के बाद कितने प्रतिशत लोगों में कोरोना की एंटीबाडी मौजूद है। पिछले साल 16 जनवरी को इस अभियान की शुरूआत हुई थी।सरकार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में ओमिक्रोन वैरिएंट के कम घातक होने की एक प्रमुख वजह सफल टीकाकरण अभियान भी है। पिछले एक साल में भारत में 18 साल से अधिक उम्र के 92 फीसद लोगों को टीके की कम से कम एक डोज लग चुकी है। वहीं 72 फीसद से अधिक ऐसे लोग हैं, जिन्होंने टीके की दोनों डोज ले ली है। इस आयुवर्ग के पूर्ण टीकाकरण के लिए लगभग 30 करोड़ डोज की जरूरत पड़ेगी।इसी तरह से 15 से 18 आयुवर्ग के लगभग सात करोड़ किशोरों में चार करोड़ 15 लाख डोज लगाए जा चुके हैं। इनके पूर्ण टीकाकरण में लगभग 12 करोड़ डोज और लगेंगे। इसके अलावा लगभग लगभग तीन करोड़ हेल्थ केयर वर्कर्स और फ्रंट लाइन वर्कर्स को सतर्कता डोज लगाने का काम तेजी से चल रहा हैं।इनमें भी 50 लाख से अधिक को सतर्कता डोज लगाए जा चुके हैं। 60 साल से आयुवर्ग में 12.40 करोड़ को एक डोज और 10.37 करोड़ को दोनों डोज लगाए जा चुके हैं। इनमें सिर्फ गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों को सतर्कता डोज लगाया जाना है। उम्मीद की जा रही है कि इन्हें सतर्कता डोज देने के लिए तीन से चार करोड़ डोज की जरूरत पड़ेगी।

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