बढ़ाने वाली ताक़त को फ़ितरत और कन्ट्रोल करने वाली ताक़त.को दीन कहते हैं – मौ .तस्लीम रज़ा बुख़्ल से बचो सख़ी बन जाओ , रियाकारी से बचो एख़लाक़ से पेश आओ । कामयाबी कदम चूमेगी , दुश्मन ज़ेर होगा ।
नेवाज अंसारी संवाददाता तहसील रामसनेहीघाट
बाराबंकी ।जो आख़ेरत मांगते हैं ख़ुदा उन्हें दुनियां गिफ़्ट में दे देता है।दुनियां तो आखेरत की खेती है ।जो दुनियां पसन्द करते हैं उनकी आखेरत जहन्नम है ।तुम्हारा रब वो है जिसकी अता ग़ैरे मुनक़ता है ।सूरये कौसर निहायत मुख़्तसर होने के बावजूद निहायत कमाल का हामिल है। बढ़ाने वाली ताक़त को फ़ितरत और कन्ट्रोल करने वाली ताक़त.को दीन कहते हैं ।खैबर का फ़ातेह ही कौसर का शाक़ी है । बुख़्ल से बचो सख़ी बन जाओ ,रियाकारी से बचो एख़लाक़ से पेश आओ । कामयाबी कदम चूमेगी , दुश्मन ज़ेर होगा ।आख़िर में बीबी फ़ातिमा जहरा के मसायब पेश किये जिसे सुनते ही मोमनीन बिलख बिलख कर रोने लगे ।मजलिस से पहले बेहतरीन फिक्रों के साथ अपना कलाम पेश करते हुए अजमल किन्तूरी ने पढ़ा – जिसको शहज़ादिये कौनैन से बेज़ारी है ,मेरी नज़रों में यही दीन से गद्दारी है।इसका साया हमें महशर में मयस्सर होगा , ये अज़ादारी की सूरत में शजरकारी है । मुहिब रिज़वी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा- किस तरह लिक्खे क़लम तेरा कसीदा ज़हरा,कभी क़ूज़े में समाता नहीं दरिया ज़हरा। हर तरफ़ है तेरा क़ुरआन में चर्चा जहरा,आयतें तुझपे किये बैठी हैं साया ज़हरा । सरवर अली करबलाई ने अपना कलाम पेश करते हुए पढ़ा – बिन्ते रसूल हमसरे हैदर है फ़ातिमा, अजमत में मुरतज़ा के बराबर है फ़ातिमा।ग़ैबत में देखो नश्ले पयम्बर है आज भी , हक़ है जवाबे तानये अबतर है फ़ातिमा । अदनान रिज़वी व ज़ईम क़ाज़मी ने भी नज़रानये अक़ीदत पेश किया।मजलिस का आग़ाज़ तिलावते कलाम ए पाक से जीशान नक़वी ने किया। अन्जुमन ग़ुन्चये अब्बासिया ने नौहाख्वानी व सीनाज़नी की । मोमनीन बाराबंकी की जानिब से तीन रोज़ा मजलिस की दूसरी मजलिस में आने वालों का शुक्रिया अदा किया। सिलसिले की तीसरी मजलिस मौलाना ग़ुलाम अस्करी हाल में होगी ।
नेवाज अंसारी संवाददाता तहसील रामसनेहीघाट

