एल्गिन ब्रिज खतरे के निशान से ऊपर, 80 गांव बढ़ा बाढ़ का खतरा

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

बाराबंकी। नेपाल के बैराजो से सरयू नदी में छोड़े गए पानी से जिले की तीन तहसीलों के 80 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन सभी गांवों में पानी भर गया है। सरजू नदी में एल्गिन ब्रिज पर पानी खतरे के निशान से 78 सेमी ऊपर बह रहा है। इससे इन गांवों की करीब दो लाख आबादी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से इनका संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। बाढ़ पीड़ित नावों के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं। तराई में चारों और पानी ही पानी नजर आ रहा है, जिससे बाढ़ पीड़ितों की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। बारिश और बाढ़ के चलते पीड़ितों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए तीनों तहसीलों के एसडीएम के साथ फ्लड पीएसी को लगाया है जो बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद कर रही है। एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार बैराजों से कल सरयू नदी में छोड़ा गया नेपाली पानी से आज नदी का पानी खतरे के निशान से 78 सेमी. ऊपर पहुंच गया है। इसके साथ ही नदी का जलस्तर एक सेमी. प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। नदी का जलस्तर अभी और बढ़ेगा, इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है। तहसील सिरौलीगौसपुर, रामनगर व रामसनेहीघाट क्षेत्र के 80 गांवों की करीब दो लाख आबादी पर परिवार को सुरक्षित रखने का संकट मंडराने लगा है। इन गांवों में बने स्कूल और अस्पताल भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। संपर्क मार्गों पर पानी बहने के कारण लोग परिजनों को नावों के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हुए हैं। वहीं फ्लड पीएसी भी बाढ़ पीड़ितों की मदद कर रही है। पर्वतपुर, तेलवारी गांव के निकट हो रही तेज कटान में अभी तक कई मकान नदी में समा चुके हैं, लेकिन कटान अभी रुकी नहीं है। सरयू नदी का पानी बढ़ने के साथ कटान और तेज हो गई है। यह देख कटान रोकने में लगे बाढ़ खंड के अधिकारी भाग खड़े हुए हैं। जबकि इन गांवों में करीब एक दर्जन घर कटान के मुहाने पर हैं। उसके बाद भी अधिकारियों की ओर से लापरवाही बरती जा रही है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही अलीनगर रानीमऊ तटबंध पर जगह-जगह फिर बड़े-बड़े रेनकट हो गए हैं, जो बांध को कमजोर कर देते हैं। इससे बाढ़ के दौरान बांध के कटने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। इन रेनकटों को सही करने के लिए हर साल करोड़ों रुपये का बजट जारी होता है, इसके बाद भी रेनकट की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आरोप है कि रेनकट सही कराने के नाम पर मिट्टी की पटाई और घास की सफाई कराकर पैसा निकाल लिया जाता है। अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया की तीनों तहसीलों के एसडीएम के साथ ही फ्लड पीएसी को बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगाया गया है। बाढ़ क्षेत्र में बराबर नजर रखी जा रही है। बाढ़ पीड़ितों यथासंभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। उप जिलाधिकारी रामनगर तान्या ने कहा राहत एवं बचाव कार्य जारी है।बाढ़ से निपटने के लिए सारी तैयारियां पहले से ही है। तहसील के सभी अधिकारी कर्मचारी बाढ़ पीड़ित गांव में मौजूद है।

मामुन अंसारी जिला ब्यूरो बाराबंकी(एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)9044641489

 

 

 

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