यज्ञ मे डाली गई आहुतियों से पर्यावरण की शुद्धि होती है…
शान्ती देवी अवधेश वर्मा एसएम न्यूज़24टाइम्स विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी 8707331705
मसौली बाराबंकी । यज्ञ शब्द यज् धातु से सिद्ध होता है । जिसका अर्थ है देवपूजा ,संगतिकरण और दान । संसार के सभी श्रेष्ठ कर्म यज्ञ कहे जाते हैं परोपकार की सर्वोत्तम विधि हमें यज्ञ से सीखनी चाहिए। यज्ञ मे डाली गई आहुतियों से पर्यावरण की शुद्धि होती है जिससे सारे विश्व का कल्याण होता है । आर्य समाज रसौली के 87 वें वार्षिकोत्सव के प्रथम दिन प्रातः कालीन यज्ञ के पश्चात उक्त विचार प्रकट करते हुए बरेली से पधारे पं• विमल देव अग्निहोत्री ने कहा कि प्रायः लोगों का विचार होता है कि यज्ञ मे डाले गए घृत आदि पदार्थ व्यर्थ ही चले जाते हैं । किन्तु उनका यह विचार ठीक नहीं है । यज्ञ मे डाले गए सुगन्धित, पौष्टिक और रोगनाशक पदार्थ सूक्ष्म होकर हमारे पर्यावरण को शुद्ध करते हैं । लखनऊ से पधारे पंडित नेम प्रकाश आर्य ने कहा कि परोपकार की सर्वोत्तम विधि हमे यज्ञ से सीखनी चाहिए। यज्ञ से वायुमंडल मे उत्पन्न सुगन्धि से सभी प्राणी आनंद का अनुभव करते है किन्तु सुगन्धि प्राप्त करने वाले याज्ञिक को नही जानते हैं यही निष्काम परोपकार है । अग्निहोत्र से वायु ,वृष्टि ,जल आदि सम्पूर्ण पर्यावरण शुद्ध होता हैं । आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने अपने परीक्षणों मे यज्ञ द्वारा वायुमंडल की शुद्धि को देखकर इस वैदिक यज्ञ पद्धति को स्वीकार किया है ।
शान्ती देवी अवधेश वर्मा एसएम न्यूज़24टाइम्स विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी 8707331705

