आर्य समाज रसौली के 87 वें वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन प्रातः पंच कुंडीय यज्ञ आयोजित किया गया ।

शान्ती देवी अवधेश वर्मा एसएम न्यूज़24टाइम्स विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी 8707331705

मसौली  बाराबंकी । आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती इस धरा पर न आये होते तो हमारी बहनें वेद के पठन-पाठन और शिक्षा के अधिकार से वंचित रह जाती ।हर्ष का विषय है कि आज नारियां देश और समाज मे अग्रणी भूमिका का निर्वहन कर रही है आर्य समाज रसौली के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव मे आयोजित महिला सम्मेलन मे उक्त विचार प्रकट करते हुए आचार्या डा• निष्ठा वेदालंकार ने कहा कि एक समय था जब स्त्री वेद पढने का अधिकार नही था । यदि स्त्री के कान मे वेद मंत्र की ध्वनि पड़ जाये तो उसके कान  मे सीसा पिघला कर डाल देने का विधान बना रखा था । कोई स्त्री को नरक का द्वार कह रहा था ।कोई कहता था कि औरत के रूह नही होती । कोई औरत को पैर की जूती बताता था । लेकिन ऋषि दयानन्द ने कहा कि यत्र नारियस्त पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता । उन्होने अपने गीत  “मेरे देश की बहनों तुम को देख रही दुनिया सारी , तुम पे बड़ी जिम्मेदारी ” के माध्यम से महिलाओ को परिवार और समाज को सुंदर बनाने का आह्वान किया ।  महिला सम्मेलन मे पंडित विमल देव अग्निहोत्री ,आचार्य पंडित अशर्फी लाल शास्त्री ,पंडित नेम प्रकाश आर्य, डाक्टर आर एन आर्य, वेदान्जलि आर्य ने संबोधित किया । इससे पूर्व प्रातः कालीन सत्र मे पंच कुंडीय यज्ञ का आयोजन किया गया । वक्ताओं ने यज्ञ की महिमा पर प्रकाश डाला ।

मसौली बाराबंकी । संसार के सभी श्रेष्ठ कर्म यज्ञ कहे जाते हैं । यज्ञ से संसार का कल्याण होता है ।  आर्य समाज रसौली के 87 वें वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन प्रातः पंच कुंडीय यज्ञ आयोजित किया गया । यज्ञ के पश्चात उक्त विचार प्रकट करते कौशाम्बी से पधारे आचार्य पंडित अशर्फी लाल शास्त्री ने कहा कि प्रायः लोगों का विचार होता है कि यज्ञ मे डाले गए घृत आदि पदार्थ व्यर्थ ही चले जाते हैं । किन्तु उनका यह विचार ठीक नहीं है । यज्ञ मे डाले गए सुगन्धित, पौष्टिक और रोगनाशक पदार्थ सूक्ष्म होकर हमारे सम्पूर्ण पर्यावरण को शुद्ध करते हैं । बरेली से पधारे पंडित विमल देव अग्निहोत्री ने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि यज्ञ से सभी शुभ कामनायें पूर्ण होती हैं । राजा दशरथ ने पुत्र की कामना से पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था । लखनऊ से पधारे पंडित नेम प्रकाश आर्य ने कहा कि परोपकार की सर्वोत्तम विधि हमे यज्ञ से सीखनी चाहिए। यज्ञ से वायुमंडल मे उत्पन्न सुगन्धि से सभी प्राणी आनंद का अनुभव करते है किन्तु सुगन्धि प्राप्त करने वाले याज्ञिक को नही जानते हैं यही निष्काम परोपकार है । अग्निहोत्र से वायु ,वृष्टि ,जल आदि सम्पूर्ण पर्यावरण शुद्ध होता हैं । आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने अपने परीक्षणों मे यज्ञ द्वारा वायुमंडल की शुद्धि को देखकर इस वैदिक यज्ञ पद्धति को स्वीकार किया है । इस अवसर पर आर्य प्रतिनिधि सभा के अंतरंग सदस्य डाक्टर राम नारायण आर्य ने अपने भजनों के माध्यम से यज्ञ महिमा पर विचार व्यक्त किए।

शान्ती देवी  अवधेश वर्मा एसएम न्यूज़24टाइम्स विशेष संवाददाता मसौली जनपद बाराबंकी 8707331705

 

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