सहसवान। पुलिस जनपद में यातायात सुरक्षा सप्ताह मना रही है जिसके तहत सड़क पर बिना हेलमेट बाइक सवारों का शहर के अंदर, कोतवाली के सामने, और शहवाजपुर छह सड़का पर प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में चालान की जा रहे हैं। मगर बिना हेलमेट वाहन चलाने वाले इन पुलिसकर्मियों पर शायद मोटर वाहन अधिनियम लागू नहीं होता जो खुलेआम बिना हेलमेट के बाइक थे फर्राटा भरते नजर आ रहे। इन पर पुलिस के अधिकारियों की नजर नहीं पड़ती क्योंकि यह पुलिस की वर्दी पहने हुए हैं इनको बिना हेलमेट के वाहन चलाने की पूरी छूट है। जबकि विधि अनुसार प्रत्येक उस व्यक्ति पर मोटर वाहन अधिनियम लागू होता है जो सड़क पर बाइक चला रहा है फिर पुलिस कर्मचारी हो यह प्रशासन का कोई अधिकारी अभी पर समान रूप से मोटर वाहन अधिनियम के सभी नियम लागू होते हैं।

फिर पुलिस कर्मचारियों को बिना हेलमेट वाहन चलाने की छूट क्यों मिली हुई है क्या इसके पीछे पुलिस की भेदभाव पूर्ण कार्यप्रणाली नहीं दिखाई दे रही है। पूरे जनपद में सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में वाहन चालकों के चालान काटे जा रहे हैं मगर जनपद के किसी थाने में अब तक बिना हेलमेट वाहन चलाते किसी पुलिस कर्मचारी का कोई चालन नहीं काटा गया। जबकि
नगर में पुलिस के वाहन चेकिंग अभियान से वाहन चालक परेशान हैं। उनको चालान के नाम पर बेवजह परेशान किया जा रहा है। कागजात पूरे होने और यातायात नियमों का पालन करने के बावजूद जबरन चालान किए जा रहे हैं। हालत यह है कि चालान करने के लिए पुलिस के पास वाजिब कारण भी नहीं होता है। पुलिस चेकिंग की आड़ में बाइक चालकों को हेलमेट के नाम पर परेशान करने लगी है। हेलमेट के नाम पर नगर के शहवाजपुर चौराहा बिसौली बस स्टैंड सहित कोतवाली के सामने वाहन चेकिंग होने से बाइक सवारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जिन बाइक सवारों के पास बाइक के सभी कागज़ भी होते उन बाइक सवारों का हेलमेट के नाम पर उनका भी चालान काट दिया जाता है ज्ञात रहे के नगर के अंदर हेलमेट न लगाने से एक्सीडेंट का आंकड़ा दो प्रतिशत भी नहीं है। फिर भी पुलिस चौराहों पर वाहन चेकिंग के नाम पर आम लोगों को प्रताड़ित कर रही है। अगर पुलिस को बाइक चेकिंग ही करनी है तो नगरीय सीमा से बाहर हाईवे पर करे, जहां हेलमेट न पहनने से दुघर्टना का खतरा ज्यादा बना रहता है। जबकि भीड़ की वजह से नगर के अंदर ज़्यादातर लोगो की दोपहिया वाहनों की रफ्तार 20 किलोमीटर प्रति घंटे से भी कम है। घनी आबादी में रहने वाले लोगों को कभी दवा लेने या घरेलू सामान लेने या अन्य छोटे-मोटे कामों से बाइक या स्कूटर से बाहर जाना होता है तो वह हेलमेट नहीं लगा पाते। घनी आबादी में वाहन चालक हार्न का भी कम प्रयोग करते हैं। हेलमेट पहनकर घनी आबादी के बीच में वाहन में संतुलन नहीं बन पाता है। फिर नगर के अंदर बिना हेलमेट दुघर्टना का ग्राफ भी शून्य है। ऐसे में हेलमेट के नाम पर चालान कर दिया जाता है।
*मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) सहसवान- बदायूं 9719216984*

