सड़को के बारे में सरकार क्यों नहीं चेतती..! राजनीतिक स्वार्थ किसी भी कानून को असरकारक तरीके से लागू कराने में बनते बाधा!
सड़क पर ट्रैफिक नियमों का पालन बड़े लोग तोड़ते,गरीब पर पड़ती मार..!
वाहन स्वामी चालान से बचने के लिए नहीं,मेहनत से कमाए धन और अपनी कीमती जान बचाने के लिए यातायात का करें पालन
दरअसल हम सब अपनी व्यवस्था को बिगाड़े हुए हैं इसीलिए जागरूकता कहीं नहीं दिखती। क्या ज्यादा बिगड़े हुए लोगों में सुधार की गुंजाइश नहीं है? यातायात कानून लागू करने से पहले या धूमधाम से लागू होने के बाद कोशिश हुई लेकिन कम, कानून तो लागू हो गया, अब जो जुर्माना भरता है उसके कान हमेशा के लिए खड़े हो जाते हैं लेकिन जिन कुछ लोग राजनीति के करण बेफिक्री से चलते हैं उनकी आज भी मोज़ हैं उन्हें कोई जुर्माने का डर नही हैं
तो वही जिन क्षेत्रों में सड़कों का स्वास्थ्य ठीक नहीं है,ओर बड़े बड़े गड्ढे बीच सड़को पर बन गए हैं और वाहन चालको की जान पर खतरा बना हुआ उस ओर उन सड़को के बारे में सरकार नहीं चेतती। वाहन चालक सतर्क हो रहे हैं, लेकिन अभी कितनी ही मुख्य सड़कों पर तिपहिया, स्कूटर, कार, टैक्सी, यहां तक कि बस और ट्रक वालों को भी उलटी दिशा में बिना पूरे कागजात चलते देखा जा सकता है। उन्हें इसकी आदत है और बचपन से है। इतने साल से एक दोपहिया वाहन पर तीन, कभी-कभी तो एक परिवार के चार भी सवार होते हैं। बुद्धिमान लोगों ने यह सोच कर किया होगा कि अगर चार लोग दो वाहनों पर जाएंगे तो एक और वाहन खरीदना पड़ेगा। सड़क पर पहले ही इतनी भीड़ है, इस बहाने लोगों के बीच दोगुने वाहन की बिक्री हुई।
लालबत्ती है तो सही, पर निकल लो’, यह सोच कर ऐसे कई क्षेत्रों में जहां यातायात पुलिसकर्मी खड़ा होता है। इसके बावजूद लालबत्ती की अनदेखी कर निकलने वाले निकल ही जाते हैं। हालांकि वे पकड़े जाने की स्थिति में खिसियाकर नकद भुगतान करते होंगे। यों अछा वाहन चालक उसे माना जाता है जो रात को खाली सड़क पर भी ट्रैफिक नियमों का पालन करे। हमार देश में कानून कैसे प्रयोग किया जाता है, सब जानते हैं। कहने और लिखने वाले कहते रहे हैं कि जब भी कानून बदलता है, कुछ लोगों का नुकसान होता है तो दूसरों का फायदा भी होता है। हमारे राजनीतिक स्वार्थ किसी भी कानून को असरकारक तरीके से लागू करने में बाधा बनते देखे गए हैं।सरकार और प्रशासन की यह पहली जिम्मेदारी है कि सड़क के गड्ढे, खोदी हुई सड़क के टुकड़े, खराब सिग्नल, अतिक्रमित फुटपाथ, टूटी लाइटें, पुरानी,व खराब और अंधेरी सड़कें आदि अविलंब दुरुस्त किए जाएं। पुलिस के लिए कानून लागू करना आवश्यक है, लेकिन अक्सर यह सूचना मिलती है कि कर्मचारियों की कमी है। उनकी यह कमी भी दूर की जानी जरूरी है। उन्हें भी सुरक्षात्मक तरीके से नौकरी करनी होती है। आजकल छोटी नहीं, बेहद मामूली बातों पर भी लोग बहस करने लगते हैं और कई बार स्थितियां गंभीर हो जाती हैं।
सबसे अहम बात, जिस पर हमारे देश में कभी संजीदगी से अमल नहीं किया जाता, वह है बचपन से ही गली, बाजार या सड़क पर चलने के बारे में अभिभावकों द्वारा बच्चों को बताना और समझाना। वाहन चलाने की उचित उम्र से पहले दोपहिया न दिलवाना। अगर दबाव हो तो बातचीत के माध्यम से बच्चों को समझाना। ट्रैफिक नियमों के अनुसार ही वाहन चलाने की सलाह देना। सरकार को चाहिए कि ऐसे कम शक्ति वाले दोपहिया वाहन, जिन्हें चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस की बाध्यता नहीं है, के बारे में फिर से विचार कर उनके चलाने के लिए भी ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य करे।
सभी मार्गों पर गति नियमन सख्ती से लागू करते हुए डिजिटल चालान प्रणाली अविलंब प्रयोग में लाने चाहिए। इस संदर्भ में सामाजिक संस्थाएं, खासतौर पर सड़क सुरक्षा क्लब, जो आमतौर पर शासक पार्टी द्वारा प्रायोजित होते हैं, वे अगर चाहें तो बहुत अहम और सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। चालान से बचने के लिए ही नहीं, मेहनत से कमाए धन और अपनी कीमती जान बचाने के लिए अपना चाल-चलन बदलना बेहतर रहेगा।

