मध्य प्रदेश का राजनैतिक संकट नहीं थमा, उच्चतम न्यायालय कल भी करेगा सुनवाई
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
मध्य प्रदेश में जारी राजनैतिक संकट का बुधवार को भी उच्चतम न्यायालय में कोई समाधान नहीं निकल पाया।
मध्य प्रदेश में फ़्लोर टेस्ट कराने की भाजपा की याचिका पर जारी सुनवाई उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार तक के लिए टाल दी है। उच्चतम न्यायालय ने विधानसभा स्पीकर को जल्द फ़ैसला लेने का आदेश दिया है। न्यायालय ने बाग़ी विधायकों से मुलाक़ात करने और रजिस्ट्रार जनरल को उनसे मुलाक़ात के लिये भेजने के कांग्रेस के अनुरोध को मानने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा है कि वह यह तय नहीं कर सकता कि सदन में किसके पास बहुमत है और किसके पास नहीं क्योंकि यह काम विधायिका का है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विधानसभा तक निर्बाध पहुंच और अपनी पसंद स्वतंत्र रूप से ज़ाहिर करने को सुनिश्चित बनाने के तौर-तरीक़ों पर वकीलों से सहायता करने को कहा। साथ ही कहा कि उसे सुनिश्चित करना है कि ये 16 विधायक स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद को जाहिर करें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 16 बाग़ी विधायकों को निश्चित रूप से बंधक नहीं बनाया जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि 22 विधायकों के त्यागपत्र के बाद कमलनाथ सरकार बहुमत खो चुकी है और वह बहुमत सिद्ध करने की मांग कर रही है। उधर कांग्रेस का कहना है कि बेंगलुरु में उसके विधायकों को बलपूर्वक बंधक बनाकर रखा गया है और भाजपा लोकतांत्रित सिद्धांतों को नष्ट कर रही है।
इस बीच मध्य प्रदेश में कांग्रेस से निकलने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के 22 विधायक 10 दिन से बेंगलुरु में हैं और कांग्रेस उन्हें मनाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ सरकार के कुछ मंत्री बेंगलुरु पहुंचे लेकिन कर्नाटक पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पुलिस की इस कार्यवाही को फ़ासीवाद बताया है।

