मानवता और भाईचारे का पैगाम देता है इस्लाम

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी। इस्लाम धर्म ने हमेशा मानवता और भाईचारे का पैगाम दिया है हमें उस पैग़ाम को आगे बढ़ाने की जरूरत है,पैगंबर मोहम्मद साहब का जीवन हमारे लिए नमूना है उनके बताये हुए रास्ते पर चल कर ही कामयाबी हासिल की जा सकती हैं। बुराई से बचना और नेकी की तरफ बढ़ना होगा वरना हमें गुमराही और तबाही से कोई बचा नही सकता।
कस्बा बड़ागांव मे तंजीम मोहम्मदी फलाह दरेन के मिनजानिब से जलसे को ख़िताब करते हुए आलियाबाद से मौलाना अशद फैजी ने ख़िताब करते हुए कही। उन्होंने कहा कि हम अपने अमल से ज़ाहिर करें कि हम मोहम्मद सला0 के मानने वाले हैं। नबी दुनिया में बुराई को मिटाने के लिए आए थे और आज मुसलमान उसी बुराई को जिंदा कर रहा है। हम नबी और सहाबा वाले काम करें । समाज में फैल रही बुराइयों पर मौलाना असद फैजी ने कहा कि इसका एक कारण बेपर्दगी है, इस्लाम मे औरतों को बेपर्दा घूमने से मना किया है। औरत का ज़ेवर ही उसका पर्दा है। जलसे की सदारत करते हुए हाफिज मौलाना कमाल ने कहा कि अगर हमें नबी से मोहब्बत है तो उनकी सुन्नतों को भी अपनाना पड़ेगा। जिस चीज को नबी ने पसंद किया उसको ना पसंद करने वाला मुर्तद हो जाएगा। सुन्नतों और नमाजों को छोड़कर हम सच्चे आशिके रसूल नही हो सकते। जलसे के सरपरस्त हाफिज आसिफ ने कहा कि मुसलमान वह है जिसके अमल से जाहिर हो, हमारे काम से किसी को तकलीफ न पहुंचे और बुराई से दूर रहें यही इस्लाम का पैगाम है। जलसे का आगाज़ कारी अब्दुल रहमान की तिलावत कुरान शरीफ से हुआ। जलसे के पश्चात लोगो द्वारा पूछे गये सवालो का जवाब मौलाना असद फैजी ने दिया उन्होंने इस्लाम मे जिना (बलात्कार) को सबसे बड़ा गुनाह बताया उन्होंने कहा कि जिना की सजा अल्लाह भी देता है और दुनिया मे भी मिलता है।
जलसे मे हाफिज साकिर अली, हाफिज जमील अहमद, मोहम्मद आरिफ खान, सगीर खान, मो आसिफ खान, सुहेल अहमद, अनीस खान, शहीर खान, सरफराज खान, रफीक अंसारी, खालिद सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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