यूरोप और अमरीका में बुज़ुर्गों को मरने के लिए छोड़ दिए जाने से आहत, ईरानी एनजीओ ने की सेवाएं देने की पेशकश

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

ईरान के पवित्र शहर क़ुम स्थित एक धार्मिक एनजीओ ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर उसके कार्यकर्ताओं को अमरीका और यूरोपीय देशों की यात्रा की सुविधा प्रदान करने का अनुरोध किया है, ताकि वे इन देशों में कोरोना वायरस महामारी के कारण नज़र अंदाज़ कर दिए गए बुज़ुर्गों की देखभाल कर सकें।ग़ौरतलब है कि ईरान में सबसे पहले क़ुम में कोरोना वायरस के मामले सामने आए थे, जिसके बाद यह महामारी पूरे ईरान में फैल गई। हालांकि क़ुम में इस बीमारी पर जल्द ही क़ाबू पा लिया गया।हाउस ऑफ़ यंग क्लैरिक्स एनजीओ ने विदेश मंत्रालय के नाम लिखे गए पत्र में कहा है कि अमरीका और कुछ यूरोपीय देशों में एक बड़ी संख्या में वायरस से संक्रमित बुज़ुर्गों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है, लेकिन हम इन ख़ुदा के बंदों की सेवा को अपनी इंसानी और नैतिक ज़िम्मेदारी समझते हैं।अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस तरह की रिपोर्टें आने के बाद कि स्पेन के सैनिकों ने कई घरों में और बूढ़ों की देखभाल के लिए बनाए गए विशेष केन्द्रों में बुज़ुर्ग बीमारों को उनके बेड पर पड़ा हुआ या मरा हुआ पाया था, ईरान के धार्मिक छात्रों की एनजीओ ने यह पत्र लिखा था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।ब्रिटेन, इलटी और अमरीका से भी इस तरह की रिपोर्टें अख़बारों में छपी हैं कि बड़ी संख्या में वायरस से संक्रमित बूढ़ों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है और उनका कोई पुरसाने हाल नहीं है।पश्चिमी सभ्यता में वैसे भी बूढ़ों को अकसर ओल्ड केयर होम में छोड़ दिया जाता है, ताकि युवा संतान पर उनकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं रहे और वे उनकी आज़ादी में रुकावट नहीं बनने पायें।लेकिन कोरोना वायरस महामारी के फैलने और अधिकांश बूढ़ों को इससे संक्रमित होने के मद्देनज़र पश्चिमी देशों में बूढ़े मां-बाप को अनदेखा करने और उनकी कोई सहायता नहीं करने के मामले काफ़ी बढ़ गए हैं।
स्पेन में दिल दहला देने वाली घटना के सामने आने के बाद, एक ईरानी लेखक मोहम्मद हुसैन राजी ने ट्वीट कियाः कितने अफ़सोस की बात है कि स्पेन में यह भयानक अपराध हुआ है, जो एक पश्चिमी देश है, लेकिन अगर ईरान में ऐसा हुआ होता, तो वे मानवाधिकारों के उल्लंघन के नाम पर ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों में वृद्धि कर देते।

Don`t copy text!