इस युग में जिसमें नकारात्मक ऊर्जा,सकारात्मक ऊर्जा को पराभूत कर रही।

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली, बाराबंकी। विकास खण्ड मसौली के भूलीगंज में सतनामी ब्रम्हयज्ञ गुरुग्रंथ श्री श्रीमद अघनिवाश जू महाराज की पावन कथा का कथावाचक व्यास पूर्णानंद शरण दास जी ने सुनाया। कथावाचक व्यास पूर्णानंद शरण दास जी ने कहा कि आज के इस पावन दिन पर जब हम स्वामी जी की अमृतमय वाणी की दूसरे सोपान की ओर बढ़ रहे है। जिसमें स्वामी जी ने ब्रह्म अमर राजा की कथा सुनाई है। जिनकी रानी का नाम सुमत्या था और पुत्र का नाम ज्ञातुराई था। इस कथा में स्वामी जी ने जीव आत्मा को ब्रह्म अमर राजा, अच्छे विचार को सुमत्या बताया है और जब इन्ही अच्छे विचार और ब्रह्म अमर यानि जीव आत्मा का मिलन होता है। तो एक विवेक नामक पुत्र का जन्म होता है। जिसे साहब ने ज्ञातुराई बताया है ।ये कथा भगवान ब्रह्मा अपने पुत्र नारद को समझाने के लिए सुना रहे है,क्योंकि देवर्षि नारद भी उसी प्रकार भ्रमित थे। जिस प्रकार आज हम सब है क्योंकि हम आप ब्रह्म अमर (जीव आत्मा), सुमत्या (अच्छे विचार) और ज्ञातुराई (विवेक) में ना पड़ कर के कुमन्स नाम राजा में पड़ जाते है अर्थात कु मतलब खराब मन्स मतलब मन जिनकी स्त्री का नाम माया है और हम सब उसी माया के जाल में फंसते जा रहे हैं। आज के इस युग में जिसमें नकारात्मक ऊर्जा,सकारात्मक ऊर्जा को पराभूत कर रही हैं।हम भी उसी मोह माया के पिंजरे में फसते जा रहे हैं और इस बात से वंचित हैं की ये सब मिथ्या हैं। क्योंकि एक दिन ये सब इसी धरा पर रह जायेगा, इसलिए स्वामी जी कहते हैं की मनुष्य को माया त्याग कर भक्ति में लीन होना चाहिए। क्योंकि जिस मानव के शरीर में अच्छे विचारों का वास होता है। वही भक्ति स्वरुपा है और यदि कोई मनुष्य ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर चलकर अपने ह्रदय में वास कर रहे ईश्वर को पहचान लेता हैं और अपने भीतर विवेक को स्थापित कर लेता है ।उसका रोम सदैव शुद्ध रहता है और हर प्रकार की विक्रतियों से मुक्त रहता है। अंततः साहब कहते हैं की सत्याश्रय एवं सत्यमय जीवन के बिना धर्म-कर्म एक ढकोसला बनकर रह जाता है। इसीलिए प्रत्येक मनुष्य को माया त्याग कर एक सतनामी बनना है। क्योंकि जिस मनुष्य के भीतर सत् जीवन की निष्ठा जाग गयी, सर्वजनीम प्रेम उमड़ आया हो एवं परमात्मा के सानिध्य की लालसा जागृत हो गयी वही सच्चा सतनामी है। इस मौके पर जगजीवन राम सहित अन्य लोग मौजूद रहे

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