-ढाई हजार से ज्यादा मंदिरों का प्रबंधन देखने वाले दो मंदिर बोड्र्स ने लगाया प्रतिबंध
नई दिल्ली । केरल सरकार द्वारा नियंत्रित दो मंदिर न्यासों ने मंदिरों में ओलिएंडर प्रजाति के फूल यानी कनेर फूल की एक किस्म के चढ़ाए जाने पर पाबंदी लगा दी। ये मंदिर न्यास 2500 से ज्यादा मंदिरों की देखरेख करते हैं। स्थानीय भाषा में अरली कहलाते इन फूलों के बारे में कहा जाता रहा कि ये जहरीले होते हैं। अब एक युवा नर्स की मौत ने मामले को तूल दे दी, और आनन-फानन ही मंदिर कमेटी ने फूलों पर ही बैन लगा दिया। ये फैसला 24 साल की नर्स सूर्या सुरेंद्रन की मौत के बाद लिया गया। सुरेंद्रन जो कि यूके में नई नौकरी के लिए जाने के लिए तैयार थी, उन्होंने लापरवाही में घर पर उगे कनेर की कुछ पत्तियां खा लीं। इसके बाद वे एयरपोर्ट के लिए निकल गईं, जहां उनमें पॉइजनिंग के लक्षण दिखे। कोच्चि एयरपोर्ट पर सुरेंद्रन ने बताया कि उन्होंने आखिरी चीज फूल के पत्ते खाए थे। कुछ दिनों के भीतर अस्पताल में उनकी मौत हो गई। पीएम में भी पॉइजनिंग की पुष्टि हुई। दक्षिण केरल में कथित तौर पर ओलिएंडर खाने से ही पशुओं की भी मौत हो चुकी। इन बोड्र्स ने लिया फैसला नर्स की मौत के बाद मामला गरमाया और ये डर बढ़ा कि फूल किसी बड़े हादसे का कारण न बन जाएं। बता दें कि केरल समेत देशभर के मंदिरों में ओलिएंडर के फूल चढ़ाया जाना आम है। अपने यहां की घटना को देखते हुए राज्य सरकार के मंदिर न्यास ने फैसला लिया कि मंदिरों में ये फूल नहीं चढ़ाया जाएगा। जिन दो बोड्र्स ने ये तय किया, वे त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (टीडीबी) और मालाबार देवस्वोम बोर्ड (एमडीबी) हैं। क्या है ओलिएंडर फूल ओलिएंडर का पूरा नाम नेरियम ओलिएंडर है, जिसे रोजबे भी कहा जाता है। आमतौर पर उष्णकटिबंधीय देशों में उगने वाले फूल की खासियत है कि ये सूखे में भी जल्दी नहीं मुरझाता। इसी खूबी की वजह से इसे लैंडस्केपिक सौंदर्य के लिए भी उगाया जाता है। जैसे केरल की ही बात लें तो वहां के हाईवे और बीच के आसपास ओलिएंडर खूब उगाए गए हैं। ये सुंदर भी लगते हैं और पानी के बिना लंबे समय तक जिंदा भी रह जाते हैं, मतलब लो-मेंटेनेंस हैं। केरल में अरली या कनवीरम कहलाते इस फूल को उत्तर भारत में कनेर भी कहते हैं। लेकिन इसकी कई किस्में होती हैं और हर किस्म का रंग-गंध अलग रहता है, जिस हिसाब से उसका नाम भी बदल जाता है। ये पीले, गुलाबी और सफेद रंग के होते हैं।

