भक्ति के लिए भावना भक्तराज प्रहलाद और ध्रुव की तरह होनी चाहिए। जो मनुष्य सत्संग और प्रभु मनन में लीन रहता है। उस पर संतों के साथ-साथ स्वयं नारायण कृपा बरसाते हैं। भगवान को अपने भक्त बेहद प्रिय होते हैं।
सतीश कुमार
यह बात क्षेत्र के सराय नेतामऊ में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास सुरेश चंद्र मिश्रा महाराज ने कही।उन्होंने कहा कि जो सच्चे हृदय से भगवान को याद करते हैं, उन पर उनकी कृपा सदा बनी रहती है, लेकिन वर्तमान में मनुष्यों में धर्म के प्रति दिखावा अधिक है। इससे बचना चाहिए। ऐसे में मनुष्य को दिखावा न करते हुए भगवान को सच्चे हृदय से याद करना चाहिए। भागवत कथा सुनने से ऊर्जा का संचार होता है।भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है।प्रह्लाद चरित्र के बारे में विस्तार से सुनाया और बताया कि भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी है और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए एवं हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति को अच्छे व पुण्य के कार्य करने चाहिए। अच्छे कार्यो को करना ही प्रभु की सच्ची सेवा है।जहां पर भगवान की कथा होती हैं वहां पर सभी विराजमान देवतागण और भक्त शिरोमणि हनुमान भी कथा सुनने आते हैं। राम नाम लेने से आनंद की प्राप्ति होती है। संतों की कृपा से ही भगवान के दर्शन होते है। राधे लाल वर्मा,लवकुश शर्मा,दया शंकर शुक्ला,राजकुमार रावत आदि लोग मौजूद रहे।
टिकैतनगर (बाराबंकी): भक्ति के लिए भावना भक्तराज प्रहलाद और ध्रुव की तरह होनी चाहिए। जो मनुष्य सत्संग और प्रभु मनन में लीन रहता है। उस पर संतों के साथ-साथ स्वयं नारायण कृपा बरसाते हैं। भगवान को अपने भक्त बेहद प्रिय होते हैं।
यह बात क्षेत्र के सराय नेतामऊ में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास सुरेश चंद्र मिश्रा महाराज ने कही।उन्होंने कहा कि जो सच्चे हृदय से भगवान को याद करते हैं, उन पर उनकी कृपा सदा बनी रहती है, लेकिन वर्तमान में मनुष्यों में धर्म के प्रति दिखावा अधिक है। इससे बचना चाहिए। ऐसे में मनुष्य को दिखावा न करते हुए भगवान को सच्चे हृदय से याद करना चाहिए। भागवत कथा सुनने से ऊर्जा का संचार होता है।भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है।प्रह्लाद चरित्र के बारे में विस्तार से सुनाया और बताया कि भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी है और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए एवं हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रत्येक व्यक्ति को अच्छे व पुण्य के कार्य करने चाहिए। अच्छे कार्यो को करना ही प्रभु की सच्ची सेवा है।जहां पर भगवान की कथा होती हैं वहां पर सभी विराजमान देवतागण और भक्त शिरोमणि हनुमान भी कथा सुनने आते हैं। राम नाम लेने से आनंद की प्राप्ति होती है। संतों की कृपा से ही भगवान के दर्शन होते है। राधे लाल वर्मा,लवकुश शर्मा,दया शंकर शुक्ला,राजकुमार रावत आदि लोग मौजूद रहे।

