जच्चा बच्चा की मौत के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, किया इससे भी बड़ी घटना का स्वास्थ्य विभाग कर रहा है इंतजार जगह-जगह खुले हैं झोलाछाप के अस्पताल

मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं

नवजात शिशु की सुरक्षा की नाम पर खुला है झोलाछाप का एनआईसीयू, पीसीयू,सीपीएपी हॉस्पिटल

सहसवान, बदायूं । जनपद के नगर सहसवान में बीते कई वर्षों से बदायूं मेरठ राज्य मार्ग 18 से ग्राम डकारा जाने वाले मुख्य मार्ग पर (अकबराबाद मोहल्ले की मोड ) निकट मंडी समिति के पीछे नवजात शिशु की सांस लेने में हो रही दिक्कत (क्रिटिकल बीमारी) के नाम पर एक झोलाछाप चिकित्सक एनआईसीयू,पीसीयू,सीपीएपी खुलकर सहसवान बिल्सी बिसौली जनपद संभल की तहसील गुन्नौर के नवजात शिशुओ का ईलाज कर रहा है। स्वास्थ्य सेवा के नाम पर नवजात शिशुओं के अभिभावकों से लाखों रुपए की इलाज़ के नाम पर वसूली की जा रही है। जबकि क्रिटिकल सेंटर के नाम पर उनके अस्पताल में शिवाय ऑक्सीजन सिलेंडर के कुछ भी नहीं है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बाकायदा इस अस्पताल संचालक ने क्षेत्र के अंतर्गत जगह-जगह अपने दलाल नियुक्त कर रखे हैं जो वहां से नवजात शिशुओं को इसके हॉस्पिटल में भर्ती करने के लिए भेजते हैं। इसके बदले उन्हें मोटा कमीशन दिया जाता है।
बाकायदा केंद्र संचालक ने अस्पताल के मुख्य द्वार पर बड़े-बड़े शब्दों में एनआईसीयू,पीआईसीयू,सीपीपी सेंटर लिखवा कर यह भी लिखवा दिया है कि यहां क्रिटिकल नवजात शिशु का उपचार किया जाता है और विशेषज्ञ चिकित्सक( नवजात शिशु) के संरक्षण में उनकी देखभाल की जाती है जबकि विशेषज्ञ चिकित्सक के नाम पर अस्पताल में मात्र झोला छाप स्टाफ कर्मचारी ही उपस्थित रहते हैं। जो अस्पताल में पहुंचे नवजात शिशुओं की इस प्रकार सेवा करते हैं। जैसे इन झोलाछापों ने विदेशी या किसी अच्छे मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करके डिग्री ली हो। सेवा भाव ऐसा होता है जैसे की मेहमान का सेवा भाव कर रहे हो। बात यहीं खत्म नहीं होती बल्कि नवजात शिशु की हालत बिगड़ने पर खुद एम्बुलेंस बुलाकर उन्हें अपने पसंदीदा अस्पताल में यह कहते हुए रेफर्स स्लिप बनाते हैं जैसे कोई हायर सेंटर डॉक्टर किसी गंभीर मरीज को रेफर करता है।
रेफर करने तक ही बात खत्म नहीं हो जाती बल्कि क्रिटिकल सेंटर मुख्य मार्ग पर खुला हुआ है जहां से प्रत्येक दिन कोई ना कोई स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी का आवागमन होता है। जिस मार्ग पर यह क्रिटिकल सेंटर खुला है वह मार्ग बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में भी जाता है। परंतु किसी भी स्वास्थ्य विभाग के या प्रशासन के अधिकारी ने क्रिटिकल केंद्र को चेक करने का जोखिम नहीं उठाया। बताया जाता है कि सहसवान के अलावा बदायूं जनपद के समस्त अधिकारियों को प्रति माह लाखों रुपए उनका मुंह बंद करने के नाम पर महीने के प्रथम सप्ताह में पहुंचता हैं। अब देखने वाली बात यह होगी की स्वास्थ्य विभाग इस शिशुओं के इलाज के नाम पर दिन में ही डकैती डालने वाले अस्पताल पर क्या कार्यवाही करता है या फिर सब कुछ यूं ही चलता रहेगा।

मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं

Don`t copy text!