सहादतगंज में फिर छाया मातम , 15 दिन में दो युवा असमय मौत के शिकार, तीन नन्ही बेटियों के सिर से उठ गया पिता का साया”

शमीम अंसारी बाराबंकी

_हादसे में रिजवान की मौत, तीन नन्हीं बेटियाँ हुईं यतीम”_

“अब्बू कब आएंगे…? मासूम बेटियों के इस सवाल ने पूरे गांव को रुला दिया”

बाराबंकी जनपद:
बाराबंकी जिले के मसौली थाना क्षेत्र के कस्बा सहादतगंज में फिर एक दर्दनाक हादसे ने पूरे कस्बे को गमगीन कर दिया। मोहल्ला पचासा निवासी रिजवान पुत्र स्व. नसीर उर्फ मुन्ना (आर्टिफिशियल गहनों के कारोबारी) का गुरुवार को सड़क हादसे में निधन हो गया।

बताया जा रहा है कि रिजवान किसी काम से जरवल जा रहे थे, तभी रामनगर के पास उनका हादसा हो गया। घायल अवस्था में उन्हें सीएचसी पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घर में कोहराम मचा हुआ है —
पत्नी नसरीन का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बस यही कहती दिख रही हैं —

> “अब बच्चियों को कौन संभालेगा… अभी तो जिंदगी शुरू ही हुई थी…”

मां फातिमा बेटे का शव देखकर बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। मोहल्ले में सन्नाटा पसरा है। लोग कहते हैं कि रिजवान बेहद नेकदिल और मिलनसार इंसान थे, हमेशा सबकी मदद करने को तैयार रहते थे।

गांव पर पंद्रह दिन पहले ही दूसरा गम का पहाड़ टूटा था, जब ताल्हा पुत्र इसराक की फतेहपुर के मालवाड़ी में एक्सीडेंट से मौत हो गई थी। अब लगातार दो नवयुवकों की मौत ने सहादतगंज के दिल को जख्मी कर दिया है।

🕊️ *रिजवान की तीन नन्हीं बेटियों का दर्द:*
6 साल की आफरीन, 4 साल की खांसा फातिमा, और 1 साल की निदा बानो बार-बार दरवाजे की ओर देखकर मासूमियत से पूछ रही हैं —

*> “अम्मी… अब्बू कब आएंगे?”*
यह मासूम सवाल सुनकर हर आंख नम हो जा रही है।
तीनों बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया है, और घर की दीवारें भी जैसे रो रही हों।
पूरा सहादतगंज गांव गम और सदमे में डूबा हुआ है।

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