अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने कांग्रेस द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू करने के राष्ट्रपति के अधिकारों पर अंकुश लगाने वाले प्रस्ताव को वीटो कर दिया है। अब यहां यह सवाल उठता है कि क्या ट्रम्प ईरान पर हमला करने का आदेश जारी कर देंगे?
पांच कारण ऐसे हैं, जिनकी वजह से ट्रम्प ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू करने का जोखिम नहीं लेंगे।
ट्रम्प ने जब से अमरीका की सत्ता संभाली है, एक राजनेता से ज़्यादा व्यवसायी की मानसिकता के साथ शासन किया है। इस मानसिकता के साथ सीधे तौर पर ईरान से भिड़ना, एक मुश्किम काम है। इसलिए कि जब वह इस युद्ध के नतीजों और परिणामों का विश्लेषण करेंगे, तो समझ जायेंगे कि इससे होने वाला नुक़सान, उससे होने वाले फ़ायदे से कहीं अधिक है।
इस दौरान ट्रम्प ईरान को अच्छी तरह समझ गए हैं कि यह देश कोई आसान टारगेट नहीं है। उदाहरण स्वरूप, ईरान द्वारा अमरीका के सबसे आधुनिक ड्रोन ग्लोबल हॉक को गिराया जाना और इराक़ स्थित अमरीकी सैन्य अड्डे पर ईरान के मिसाइल हमलों से तेहरान अमरीकी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दे चुका है। इन दोनों घटनाओं के बाद ट्रम्प ने जुमलेबाज़ी तो बहुत की, लेकिन उनमें जवाबी कार्यवाही की हिम्मत नहीं हो सकी।
ट्रम्प यह भी जानते हैं कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों पर हमले का भरपूर जवाब देता है और भविष्य में भी ऐसा ही करेगा। शासज अल-असद छावनी पर ईरान के मिसाइल हमलों की गूंज उनके कानों में अभी तक गूंज रही होगी। इसी तरह से उनकी आंखों के सामने डरे और सहमे घायल दर्जनों अमरीकी सैनिकों की तस्वीरें भी घूम रहीं होंगी। हालांकि ट्रम्प ने यह दावा करके कि ईरानी हमले में किसी सैनिक को कोई नुक़सान नहीं पहुंचा है, अपनी अपमानजनक हार पर पर्दा डालने की पूरी कोशिश की थी। लेकिन सच दुनिया के सामने आ ही गया।
ट्रम्प नवम्बर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को हर हालत में जीतने का प्रयास कर रहे हैं और वे जानते हैं कि ईरान से सीधे टकराव की हालत में हज़ारों अमरीकी सैनिकों की लाशों की तस्वीरें और वीडियो फ़ुटेज उनका खेल ख़राब कर देंगी। इसलिए वह सिर्फ़ गीदड़ भभकियों से आगे नहीं बढ़ेंगे।
तेल की क़ीमतों में ऐतिहासिक गिरावट और कोरोना महामारी की मार झेल रही फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों की अर्थव्यवस्थाएं क्षेत्र में एक बड़े युद्ध का ख़र्चा उठाने में असमर्थ हैं।
इन वास्तविकताओं के मद्देनज़र, ट्रम्प ईरान पर हमला करके ख़ुदकुशी नहीं करना चाहेंगे, हां कांग्रेस के प्रस्ताव के वीटो का यह ड्रामा केवल चुनावी प्रचार और कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में नाकामी से हो रही चौतरफ़ा आलोचनाओं से ध्यान भटकाने के लिए है। इस दौरान अमरीकी राष्ट्रपति की लोकप्रियता में भारी गिरावट आई है, जिससे उनके हाथों के तोते उड़ गए हैं और वह कभी चीन तो कभी ईरान को निशाना बनाकर अमरीकियों का ध्यान भटकाने और अपनी गिरती ही लोकप्रियता को बचाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

