सहसवान में अवैध चिकित्सा केंद्रों पर प्रशासन का कड़ा प्रहार: ‘सेवा हॉस्पिटल’ सील, प्रमोद इंटर कॉलेज के पास चल रहे ‘अस्पताल’ पर कब होगी कार्रवाई।
मुकीम अहमद अंसारी
एसडीएम के सख्त रुख के बाद स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी से मचा हड़कंप, बिना पंजीकरण चल रहे केंद्रों के गिरे शटर।
तीन साल पहले लापरवाही के कारण हुई थी प्रसूता की मौत, पैसे के बल पर दबाया गया था मामला; नवजात बच्चों की जिंदगी भी दांव पर।
सहसवान, बदायूं। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर बिना पंजीकरण के धड़ल्ले से चल रहे अवैध चिकित्सा केंद्रों के खिलाफ प्रशासन ने अब पूरी तरह कमर कस ली है। मंगलवार को उप जिलाधिकारी के सख्त आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम हरदत्तपुर रोड पर जांच करने पहुँची। इस दौरान ‘सेवा हॉस्पिटल’ के संचालक द्वारा वैध पंजीकरण और मानकों से जुड़े दस्तावेज न दिखाए जाने पर टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे पूरी तरह सील कर दिया।”
प्रशासन की इस अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य अवैध संचालकों में हड़कंप मच गया है। इस छापेमारी टीम में मुख्य रूप से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. प्रशांत त्यागी, कृष्ण बल्लभ चतुर्वेदी और सैय्यद अशफाक हुसैन शामिल रहे।
‘अस्पताल’ और ‘नर्सिंग होम’ के अलग-अलग मानकों को ठेंगा, दो अलग बिंदुओं में समझें पूरा खेल।
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, एक ‘अस्पताल’ और ‘नर्सिंग होम’ को चलाने के कानूनी मानक बिल्कुल अलग-अलग होते हैं। लेकिन सहसवान में इन दोनों ही मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
प्रमोद इंटर कॉलेज के पास चल रहे ‘अस्पताल’ में नियमों का मखौल, किराए पर आ रहे सर्जन।
कानूनी मानकों के अनुसार, किसी भी ‘अस्पताल’ को दर्जा और पंजीकरण तब मिलता है, जब वहां चौबीसों घंटे (24/7) विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थायी मौजूदगी, आपातकालीन आईसीयू और गंभीर मरीजों को संभालने की पुख्ता व्यवस्था हो। लेकिन प्रमोद इंटर कॉलेज के पास चल रहे इस कथित अस्पताल की हकीकत बेहद डरावनी है:
स्थायी डॉक्टरों का अकाल: इतने बड़े अस्पताल में खुद का कोई स्थायी सर्जन या विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं है।
कमिशन पर बाहर से बुलावा: जब भी यहाँ प्रसव (डिलीवरी) या पथरी के ऑपरेशन का समय आता है, तो बाहर से डॉक्टरों को केवल सर्जरी करने के लिए बुलाया जाता है।
ऑपरेशन के बाद मरीज भगवान भरोसे: बाहर से आने वाले डॉक्टर ऑपरेशन करने के तुरंत बाद अपनी फीस लेकर चले जाते हैं। इसके बाद गंभीर रूप से उपचाराधीन मरीज और नवजात बच्चे की देखभाल का जिम्मा उन अप्रशिक्षित और अनुभवहीन लड़कों के हवाले होता है, जिनके पास कोई मेडिकल डिग्री नहीं है। यही स्टाफ मरीजों की ड्रेसिंग करता है और दवाइयां देता है, जो कि सीधे तौर पर मरीज को मौत के मुंह में धकेलना है।
छोटे ‘नर्सिंग होम’ के बुनियादी नियमों की भी अनदेखी, रात में हो रही अवैध वसूली।
दूसरी ओर, एक ‘नर्सिंग होम’ के मानक अस्पताल से थोड़े अलग और छोटे स्तर के होते हैं, लेकिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी का पंजीकरण, योग्य स्टाफ, फायर एनओसी और बायो-मेडिकल वेस्ट निस्तारण की व्यवस्था वहाँ भी अनिवार्य है। सहसवान के अन्य चिकित्सा केंद्र इन बुनियादी मानकों को भी पूरा नहीं करते।
आपातकाल के नाम पर लूट: रात के समय यदि कोई इमरजेंसी मरीज आता है, तो बिना किसी योग्यता वाले लड़के खुद डॉक्टर बनकर बैठ जाते हैं। मरीज की गंभीर स्थिति का फायदा उठाकर इलाज के नाम पर डराया जाता है और मनमानी फीस जमा करवा ली जाती है।
संक्रमण और गंदगी: इन केंद्रों में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे मरीजों में इंफेक्शन फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है। नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए न तो कोई बाल रोग विशेषज्ञ है और न ही आवश्यक जीवन रक्षक उपकरण।
तीन साल पहले हुई मौत को पैसे के बल पर दबाया गया था।
“स्थानीय सूत्रों के अनुसार, करीब 3 वर्ष पूर्व प्रमोद इंटर कॉलेज के पास स्थित इसी अस्पताल की घोर लापरवाही के कारण एक प्रसूता महिला की जान चली गई थी। उस समय भी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए अस्पताल संचालक ने पीड़ित परिवार को मोटी रकम देकर मामले को रफा-दफा कर दिया था। यहाँ बिना किसी सुविधा के नवजात बच्चों की जान को भी लगातार जोखिम में डाला जा रहा है।”
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर बिना पंजीकरण के अस्पतालों का धंधा स्वास्थ्य विभाग की शिथिलता और कथित लापरवाही के बिना संभव नहीं है। लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी लंबे समय तक आंखें मूंदे बैठे रहे, जिसके कारण आज गली-मोहल्लों में इलाज के नाम पर गोरखधंधा चल रहा है।
बड़ा सवाल: ‘सेवा हॉस्पिटल’ को सील करने के बाद क्या प्रशासन का यह डंडा प्रमोद इंटर कॉलेज के पास चल रहे इस बड़े अस्पताल और अन्य अवैध केंद्रों पर भी चलेगा? या फिर कुछ दिनों की इस सुगबुगाहट के बाद यह जानलेवा कारोबार दोबारा उसी रफ्तार से शुरू हो जाएगा।
*मुकीम अहमद अंसारी ब्यूरो चीफ एसएम न्युज 24 टाइम्स बदायूं*

