मास्क को कपड़ों की तरह जरूरी और मोबाइल की तरह आदत बनाने से होगा कोरोना से बचाव

संपादक मोहिनी शर्मा एडवोकेट एसएम न्युज24 टाइम्स 8004283330

नई दिल्‍ली। कोरोनाकाल में मास्क लगाना, सुरक्षित शारीरिक दूरी रखना, नियमित अंतराल पर हाथ धोना और इम्यूनिटी बढ़ाना हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। हम जब भी घर से बाहर निकलते हैं तो खुद को सामाजिक परिस्थितियों के हिसाब से तैयार करते हैं। यानी बेहतर कपड़े और जूते-चप्पल पहनते हैं। इसी तरह अब मास्क लगाने को भी अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लिया जाना चाहिए।

यदि आप मास्क लगाए बगैर बाहर निकलते हैं, तो आपको लगना चाहिए कि आपने कपड़े नहीं पहने हैं। मास्क को कपड़ों की तरह जरूरी और मोबाइल फोन की तरह आदत बना लेना चाहिए। कोरोना टीका लगने के बाद भी तीन साल तक मास्क लगाना अनिवार्य होना चाहिए। यदि यह एहतियात हमारी जिंदगी का हिस्सा भी बन जाए तो इसमें कोई बुराई भी नहीं है।

कोविड-19 तो वायरस का एक प्रकार है, ऐसे कितने अनगिनत वायरस वायुमंडल में मौजूद हैं। अभी इसने महामारी फैलाई है, हो सकता है भविष्य में किसी और वायरस का आक्रमण हो। मास्क पहनने से संभवत: उनमें से कई तरह के वायरस के आक्रमणों से बचा जा सकता है। डॉक्टरी सहित कई पेशों में अभी तक मास्क का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन मास्क का असली महत्व अब समझ में आ रहा है। इस पूरी अवधि में संभवत: हर खास और आम ने इसके फायदे को महसूस किया है।

मास्क पहनना अनिवार्य होने से लोग हवा में फैले वायरसों से बच सकेंगे।
वैक्सीन का इंतजार अब खत्म हो चुका है। टीकाकरण अभियान का मॉकड्रिल शुरू हो गया है, फिर भी पूरे देश में टीका लगने में समय लगेगा। पहले डोज के बाद दूसरे डोज का इंतजार करना होगा। साथ ही इसके बुरे प्रभावों के बारे में सही-सही जानकारी सामने आने में लंबा समय लगेगा। वैक्सीन की करोड़ों डोज बनाना आसान काम नहीं है। भारत जैसे देश में वैक्सीन को बड़ी आबादी तक पहुंचने में अभी कुछ समय लगेगा। सरकार और फार्मा कंपनियों के बीच समझौते, कई देशों की प्रतीक्षा सूची, वितरण प्रणाली और स्टोरेज जैसी कई चुनौतियां सामने आएंगी। इस दौरान जिनको वैक्सीन नहीं लगी होगी, वे एहतियात नहीं बरतने पर परेशान हो सकते हैं। मास्क लगाने, बार-बार हाथ धोने और सुरक्षित शारीरिक दूरी कायम करने से कोरोना से बचाव होता है, यह बात बीते एक साल में साबित हो चुकी है। यह टेस्टेड फॉर्मूला है और अब हमारी आदत में शुमार हो गया है।

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