जहरा न होतीं तो मक्सदे दीन अधूरा रह जाता: मौलाना फरहत

मामुन अंसारी संवाददाता एसएम न्यूज24टाइम्स बाराबंकी

बाराबंकी। जो आयात की तिलावत करता है वही जानाशिनी पैगंबर होता है यह बात इमामबाडा मरहूम रफीक हुसैन में अय्यामे फात्मीया की अलविदाई मजलिस को खिताब करते हुये मौलाना फरहत अब्बास ‘नजफी‘ सहारनपुरी ने कही। मौलाना ने कहा कि सिसकती इंसानियत में जिंदगी डालने वाली को फातिमा जहरा कहते हैं। फातिमा जहरा उस जात का नाम है जिसका कसीदा कुरआन ने पढ़ा। जहरा न होतीं तो मक्सदे दीन अधूरा रह जाता। अली वाले जालिमों के आगे सर नहीं झुकाते वो खुदा को सबसे बड़ा मान लेते हैं तो दुनियां में किसी को को कुछ नहीं समझते। मोहम्मद व अली के चाहने वाले मजलूमों के मददगार और जालिम के लिये फौलादी दीवार होते है आखिर में बीबी फातिमा जहरा और कर्बला वालों के मसायब पेश किये जिसे सुनकर सभी रोने लगे। मजलिस से पहले अजमल किन्तूरी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा कि निजामे दहर में तफ्सीरे सूरए कौसर, इमामतों का हसीं खानदान है जहरा। ये शरफ सिर्फ दरे फातिमा जहरा को मिला। कम्बर ने पढ़ा कि-ताना-ए-अबतर को सुनकर अहमदे मुख्तार ने, जो खुलूसे दिल से मांगा वो दुआ है फातिमा । मेंहदी बाराबंकवी ने अपना कलाम पेश करते हुये पढ़ा कि-ऐसी उल्फत की खुद बन्दे कफन टूट गये ,जब शहेदीं ने पुकारा तुम्हें अम्मा जहरा। हाजी सरवर अली करबलाई ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा कि-हश्र में बस वही पायेगी शिफाअत खातून। अपने किरदार में जिसनें तुझे ढाला जहरा। तू ही दुनियां में मददगार है मेरी बीबी तू ही महशर में है सरवर का सहारा जहरा। इसके अलावा आसिफ अख्तर बाराबंकवी और जईम काज्मी ने भी नजरानए अकीदत पेश किया। मजलिस का आगाज तिलावते कलाम-ए-इलाही से मौलाना अयाज हुसैन आलमपुरी ने किया बानिये मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

मामुन अंसारी संवाददाता एसएम न्यूज24टाइम्स बाराबंकी

 

 

 

 

 

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