धर्म रुपी कर्म मनुष्य के लिए लाभकारी: आचार्य विमर्श सागर

नेवाज अंसारी संवाददाता एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स)7268941211

फतेहपुर बाराबंकी। यह जीवन एक पानी की बूंद की तरह है, यह कब मिट जाएगा इसका किसी को कोई पता नही है। कभी भी किसी के साथ कोई भी होनी,अनहोनी हो सकती है।आप जैसा कर्म करोगे वैसा ही फल मिलेगा। क्योकि नीम के पेड़ में आम का फल नही मिलेगा।उक्त उद्गार भावलिंगी सन्त श्रमणाचार्य विमर्श सागर जी गुरुदेव ने भजन के माध्यम से कस्बे के जैन सन्मति भवन में चल रहे आनन्द महोत्सव के अवसर पर कही।उन्होंने कहा यह जीवन चंद दिनों का है। मनुष्य के जीवन मे सुख की आयु अल्प होती है। इसलिए मनुष्य को चाहिए धर्म का कर्म निरंतर करना चाहिए,जन्म का ज्ञान सभी को होता है किंतु मृत्यु का किसी का कोई पता नही।इसलिए मनुष्य को चाहिए प्रभु के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन का उद्धार करो। इसी कड़ी में प्रभात बेला मे भगवान शान्तिनाथ का अभिषेक पूजन आरती आचार्य श्री के सानिध्य में संगीत व भावनृत्य के साथ की गई। गुरुदेव के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य पंकज जैन,उदय जैन को मिला। वहीं संध्या बेला में आनन्द यात्रा व मंगल आरती की गई।इस मौके पर काफी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

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