देश के हर नागरिक को आवाज उठाने का हक है: आशु चैधरी -एसडीएम के रवैय्ये से जनता में आक्रोश

अब्दुल मुईद सिटी-अपराध ब्यूरो। (एस0एम0 न्यूज 24 टाइम्स) 9936900677

-मामला पहुंचा मुख्यमंत्री दरबार तक।

बाराबंकी। रामसनेहीघाट के एसडीएम दिव्यांशु पटेल की अभद्र भाषाशैली से जनता के साथ-साथ किसान नेताओं में काफी आक्रोश व्याप्त है। एक तरफ शासन अवैध अतिक्रमण हटाने की बात कह रहा है तो वहीं उसके सरकारी सेवक वैध धार्मिक स्थल हटाकर, जनता में विद्रोह उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। इस सम्बंध में भारतीय किसान यूनियन भानु के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह व प्रदेश प्रभारी आशु चैधरी व प्रदेश उपाध्यक्ष ऋषि मिश्रा ने किया मुख्यमंत्री से मुलकात।

प्राप्त जानकारी के अनुसार भारतीय किसान यूनियन भानु संगठन में हर समुदाय के लोग जुड़े हुए है जिनकी हर समस्या को सक्षम अधिकारियों से बात कर सुलझाने की प्राथमिकता रखते हुए किसान यूनियन संगठन काम करता है। तहसील रामसनेही घाट के सैकड़ो कार्यकर्ता संगठन से जुड़े हुए है। विगत 16 मार्च 2021 की रात्रि से कई कार्यकर्ताओं के फोन आये की तहसील प्रांगड़ में लगभग 100 सालों से बनी मस्जिद हटाने की नोटिस तहसील प्रशासन द्वारा भेजी गई।

ज्ञात हो कि शासन का आदेश है कि आम जन-मानस के आवागमन (रास्ते में) कोई भी धार्मिक स्थल यदि है तब वो हटाया जाएगा, वो चाहे मस्जिद हो या मंदिर। तब उन्होंने बताया की यह मस्जिद हाईवे से बहुत दूर स्थित है और वहाँ कोई आवागमन का रास्ता नहीं है और मौके की एक वीडियो भी भेजी जिसे देख कर पता चल रहा है की असल में यह मस्जिद इस नोटिस के अंदर नहीं आती है। फिर भी उपजिलाधिकारी रामसनेहीघाट को दूरभाष के माध्यम से जानकारी हेतु संपर्क किया तब जिस लहजे से उन्होंने जवाब दिया, वह बहुत निराशापूर्ण है। वायरल ऑडियो में कहीं पर शासन के आदेश के विपरीत कोई बात नहीं कही गयी।

एस. डी. एम. का कहना है कि किसान यूनियन से जुड़ा व्यक्ति किसी और समस्या पर नहीं बोल सकता। इस देश के हर नागरिक को हर समस्या पर अपनी आवाज उठाने का हक है पर ये बात शायद एसडीएम ने अपनी पूरी पढ़ाई में कहीं पीछे छोड़ दी। तानाशाह रवैया रखने वाले यह अफसर अगर प्रदेश प्रभारी के साथ ऐसा व्यवहार करते है तो आम आदमी के प्रति क्या क्या रंग ढंग रखते होंगे? तरक्की की जल्दबाजी में अफसर ने खुद यह ऑडियो वायरल करवा दिया और भूल गए कि जनता दोनों पक्ष की बात सुनती है तब किसी निर्णय पर पहुँचती है। एक बार बात अधूरी छोड़ने के बाद एस. डी. एम. दिव्यांशु पटेल फोन तक दोबारा उठाना जरुरी नहीं समझते। जिला प्रशासन की छवि अब कैसे गैरजिम्मेदार कंधो पर आधारित है ये इस वायरल ऑडियो से पता चलता है।

इस सम्बंध में जब आशू चैधरी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मैं एक किसान संघठन से हूँ, क्या आम जनमानस की किसी भी समस्या पर सक्षम अधिकारी से पूछना कोई नेतागिरी है? और यदि एसडीएम साहब इसे नेतागिरी कहते है तो में नेतागिरी करता रहूंगा। अगर इस पूरे प्रकरण में मैं जनता का दोषी हूँ तो मैं जनता से माफी माँगता हूँ, लेकिन सरकारी मशीनरी के आगे किसान यूनियन न कभी झुका है और कभी झुकेगा।

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