आख़िर ईरान के मिसाइलों से दुश्मनों में इतना ख़ौफ़ क्यों है?
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अल-जज़ीरा टीवी नेटवर्क ने ईरानी मिसाइलों से दुश्मनों के डर पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रसारित की है, जिसमें ईरान की सैन्य शक्ति का जायज़ा लिया गया है।रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पहाड़ों से घिरे इस देश की भौगोलिक स्थिति के कारण, इसके पूरे इतिहास में रक्षा क्षमता को हमेशा प्राथमिकता हासिल रही है। लेकिन ईरान-इराक़ युद्ध से तेहरान के लिए यह स्पष्ट हो गया कि उसे दुश्मनों के मुक़ाबले में शक्ति संतुलन स्थापित करने की सख़्त ज़रूरत है।
इस युद्ध में इराक़ी सेना ने ईरानी शहरों पर मिसाइल दाग़े, ईरानी नागरिक अपनी जान बचाने के लिए अपने शहरों से भाग खड़े होते थे। जिसके बाद मिसाइल कार्यक्रम ने ईरान की सैन्य रणनीति में अहम स्थान ले लिया और आगे चलकर यह ईरान की रक्षा शक्ति का मुख्य हथियार बन गया।
ईरान क्षेत्र में अपने दुश्मनों और प्रतिद्वंद्वियों से घिरा हुआ है और सऊदी अरब और इस्राईल की तरह उसे पश्चिम की आधुनिक सैन्य तकनीक तक पहुंच हासिल नहीं है। सऊदी अरब का सैन्य बजट ईरान से 9 गुना ज़्यादा और संयुक्त अरब अमीरात का रक्षा बजट ईरान से 50 फ़ीसद ज़्यादा है, हालांकि उसकी आबादी ईरान की आबादी का लगभग दसवां हिस्सा है।
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इन तथ्यों के मद्देनज़र, तेहरान ने देखा कि उसके पास बहुत पुरानी हथियार संरचना है और अपने पड़ोसियों की तुलना में उसके पास आधुनिक प्रौद्योगिकी और दक्षता नहीं है, इसलिए उसने घरेलू क्षमताओं पर ज़्यादा भरोसा किया और कम ख़र्चे वाली मज़बूत निवारक शक्ति के रूप में मिसाइल तकनीक को विकसित किया।अलजज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि ईरान की निवारक शक्ति तीन बुनियादी स्तंभों पर आधारित है। पहला, होरमुज़ स्ट्रेट में जहाज़रानी के लिए ख़तरा उत्पन्न करने की शक्ति, दूसरा हिज़्बुल्लाह जैसे सशस्त्र गुटों का इस्तेमाल और तीसरा मिसाइलों के ज़रिए काफ़ी दूरी से दुश्मनों को भारी नुक़सान पहुंचाना।
वास्तव में ईरान ने अप्रत्यक्ष रूप से मिसाइल आधारित निवारक शक्ति के महत्व का अनुभव किया है। ईरान की मदद से विकसित किए गए हिज़्बुल्लाह के मिसाइलों ने 2006 की लड़ाई में इस्राईल को गहरी चोट पहुंचाई थी और उसे भारी राजनीतिक और आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ा था। इन मिसाइलों ने इस्राईल को 3.5 अरब डॉलर की चपत लगाई थी।एक अनुमान के मुताबिक़, आज हिज़्बुल्लाह के शस्त्रागार में 1 लाख 30 हज़ार मिसाइल हैं, जिनकी सटीकता और मारक क्षमता में काफ़ी सुधार किया गया है।
लेकिन अमरीका को ईरान के उन मिसाइलों की चिंता नहीं है, जिससे वह इस्राईल को निशाना बना सकता है, उसकी असली चिंता लम्बी दूरी के या अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल हैं, जो ईरान विकसित करना चाहता है और जिनसे वह महाशक्ति को उसके घर में निशाना बना सकता है।
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कम ख़र्च में मज़बूत रक्षा शक्ति मिसाइलों के ज़रिए ही हासिल की जा सकती है। मिसाइलों पर ख़र्च होने वाले हर डॉलर के बदले ईरान अपने दुश्मनों को मिसाइल रक्षा प्रणालियों पर करोड़ों डॉलर ख़र्च करने के लिए मजबूर कर रहा है। ईरान के मिसाइलों की रेंज में हर किलोमीटर की वृद्धि से दुश्मनों का डर बढ़ जाता है, और यह बेहतरीन निवारक शक्ति है, चाहे ईरान की ओर से एक भी मिसाइल फ़ायर नहीं किया जाएसमाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ 9889789714

