रूस यूक्रेन युद्ध : सिर पर मौत का खतरा तो घर में खाने का राशन नहीं, बंकर में गुजर रही अलीगढ़ के छात्रों की जिंदगी
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ 9889789714
पापा, मैं ठीक हूं। पर, हमले के बाद से यहां दुकानें बंद हैं। राशन एक दिन का बचा है। आगे समस्या हो सकती है। उर्वसी की इस चिंता ने उनके पिता प्रतिभा कालोनी के भानु प्रताप सिंह के होश उड़ा रखे हैं। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गई अपनी बेटी की सलामत वापसी की दुआ परिवार में तीन दिन से की जा रही है। घरों में पूजा, अनुष्ठान चल रहे हैं।यह हाल जिले के 40 परिवारों का है। यूक्रेन में फंसे इनके बच्चे कब और कैसे आएंगे? यह तो इन्हें नहीं पता, लेकिन सरकार कुछ अच्छा करेगी यह उम्मीद बनी हुई है। यूक्रेन में बिगड़ेे हालात इनकी बेचैनी बढ़ाते जा रहे हैं। बच्चों से बातचीत में वहां की दशहत और जिंदगी जीने की चुनौती अकल्पनीय है।फिलहाल राहत किसी को नजर नहीं आ रही। सुशीला सिंह राजपूत ने अपनी बेटी उर्वशी से वीडियो कालिंग पर बात की। उन्होंने बताया कि बेटी हमले के खौफ के बीच अपने फ्लैट में आनलाइन पढ़ाई तो कर रही है लेकिन खाने-पीने की चीजें पांच गुना ज्यादा रेट पर थीं। अभी एक से डेढ़ दिन का राशन ही बचा हुआ है। वह उर्वशी इवानो स्थित यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रही हैं। कावेरी वाटिका निवासी मोर मुकुट यादव ने बताया कि उनका बेटा सुमित यादव इवानो में ही रहकर पढ़ाई कर रहा है। दोपहर में बात हुई तो बताया कि मार्केट बंद है, कहीं आने-जाने की संभावना नहीं है। हमले का खौफ है, आनलाइन पढ़ाई चल रही है लेकिन खाने की समस्या खड़ी हो रही है। हमले से पहले ही खाद्य वस्तुएं पांच गुना ज्यादा रेट में मिल रही थीं। अब एक दिन का राशन बचा है। फिर खाने को कुछ नहीं है। स्वर्ण जयंती निवासी अमोद उपाध्याय का बेटा सार्थक यूक्रेन की राजधानी कीवी में फंसा हुआ है। डा. विश्वमित्र आर्य का बेटा ऋत्विक वाष्र्णेय ने की रात बंकर में कटी। सुबह खाने की पूरी व्यवस्था भी नहीं कर पाए कि सायरन बज गया। छात्रों के सामने खाने-पीने का भी संकट पैदा हो गया है। एटीएम में पैसे भी खत्म होने लगे हैं।

