दातागंज मे स्टांप घोटाले की गुत्थी अनसुलझी।

मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) सहसवान- बदायूं 9719216984

ढाई साल पहले 5.70 करोड़ का हुआ घोटाला, (ईओडब्ल्यू) को ट्रांसफर हुई जांच। सख्त रुख अपनाकर शासन भी पड़ा ढीला।

बदायूँ। दातागंज में हुए 5.70 करोड़ के स्टांप घोटाले का असल जिम्मेदार कौन-कौन है। और किन अफसरों की इसमें लापरवाही रही, इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ सका है। जबकि ढाई साल बीत चुका है। जांच एजेंसी की इस हीला-हवाली का सीधा फायदा सरकारी सिस्टम में छिपे जिम्मेदारों को पहुंच रहा है।
दातागंज के उप कोषागार में घोटाला नवंबर 2019 में खुला था। वजह थी कि शासन के निर्देश पर सारे उप कोषागार बंद हो रहे थे और उनमें तैनात स्टाफ को जिला कोषागार से अटैच करने की प्रक्रिया चल रही थी। प्रारंभिक जांच में रोकड़िया हरीश व सहायक राजेश के नाम प्रकाश में आए और दोनों के खिलाफ गबन का मुकदमा तहसीलदार की ओर से लिखा गया। जबकि इसी बीच दोनों फरार हो गए। तत्कालीन डीएम की ओर से गठित कमेटी ने स्टांप बिक्री का रजिस्ट्रर से बैंक में जमा हुई धनराशि का मिलान किया तो पता लगा कि बिक्री धड़ल्ले से हुई है, लेकिन बैंक में पैसा जमा नहीं हुआ है। ऐसा साल 2013 से चल रहा था।जिस तरह से घोटाला हुआ था, उससे साफ जाहिर था कि प्रशासन के कुछ बड़े चेहरे भी इसमें शामिल थे और हिस्सेदारी लेते थे। यही वजह रही कि अफसरों ने ढिलाई बरती और रातों-रात रोकड़िया व सहायक करोड़ों में खेलने लगे। अफसरों को भी इसका मोटा हिस्सा जाता था। रोकड़िया अदालत में पेश हुआ, जबकि बाद में पुलिस ने उसे रिमांड पर भी लिया लेकिन वह ज्यादा कुछ नहीं बता सका। बाद में जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडव्ल्यू) ट्रांसफर हो गई और प्रकरण ठंडा पड़ गया। लेकिन असल गुनाहगार बेनकाब नहीं हो सके।

मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) सहसवान- बदायूं 9719216984

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