त्रेता युग में भगवान परशुराम के फरसे के प्रहार से अस्तित्व में आया सरसोता।
मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) सहसवान- बदायूं 9719216984
सहसवान। त्रेता युग में भगवान परशुराम के फरसे के प्रहार से अस्तित्व में आया सरसोता आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को विवश है। सातो सोतों ने पानी देना बंद कर दिया है पानी न होने से इसमें रहने वाली मछलियां भी नहीं रही, एक समय था जब काफी संख्या में मछलियां सरसोता में पाई जाती थी। और श्रद्धालु स्नान करने के बाद मछलियों को खीले खिलाया करते थे। अब केवल विशेष अवसरों पर समर के द्वारा सरसोता में पानी भरा जाता है। श्रद्धालु इस पवित्र सरोवर में स्नान कर पूजा अर्चना कर मन्नत मांगते हैं। हालांकि सरसोता पर पवित्र कुंड में पानी भरने के लिए पूर्व एमएलसी जितेंद्र सिंह यादव ने अपने निजी पैसे से समरसेबल करवाया और बिजली की लाइन को मंजूरी दिलाकर खिंचवा दिया। इसके बाद पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव, पूर्व राज्य मंत्री ओमकार सिंह यादव ने सरसोता के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया और एक करोड़ रुपए सरसोता के विकास के लिए दिए। इस पैसे से सरसोता की सीढ़ियां, यात्री सैड, चारों ओर की ग्रिल के साथ-साथ इंटरलॉकिंग व गेस्ट हाउस का निर्माण कराया गया। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद सरसोता को तीर्थ स्थल के साथ पर्यटक स्थल घोषित किए जाने की मांग उठने लगी। हालांकि अभी तक सरसोता को पर्यटक स्थल घोषित नहीं किया गया है। मगर आगे चलकर पर्यटक स्थल घोषित होने की प्रबल संभावना बनी हुई है। जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार द्वारा सरसोता की भूमि की चारदीवारी कराई जा रही है। वैसे तो सरसोता के नाम लगभग सौ बीघा अपनी भूमि है जिसकी देखभाल सरसोता कमेटी द्वारा की जाती है। मगर उचित देखभाल न होने के कारण अधिकांश भूमि पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर रखा है। तत्कालीन विधायक मीर मजहर अली उर्फ नन्हे मियां ने सरसोता को पर्यटक स्थल घोषित किए जाने के लिए काफी प्रयास किए थे। उनके यह प्रयास राजनीतिक अड़ंगेबाजी की भेंट चढ़ गए।
पौराणिक तीर्थ स्थल सरसोता का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा बताया जाता है। किंबदंती है कि महाराजा सहस्राबाहु ने एक बार भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि के आश्रम में जाकर उनकी कामधेनु गाय को ले आने की इच्छा प्रकट की थी मगर महर्षि जमदग्नि ने कामधेनु गाय को देने से इंकार कर दिया। तब महाराज सहस्राबाहु ने महर्षि जमदग्नि के आश्रम पर आक्रमण कर दिया और कामधेनु गाय को जबरिया खोल कर ले गया। तब भगवान परशुराम क्रोधित हो उठे। सहस्राबाहु और परशुराम के बीच भीषण युद्ध हुआ। परशुराम ने सहस्रबाहु का वध कर दिया तथा किले को अपने फरसे से पलट दिया। कहां जाता है उस समय अपनी प्यास बुझाने के लिए परशुराम ने जमीन पर फरसे से सात प्रहार किए जिससे सात धाराऐ जमीन से फूट उठी और यह स्थान सप्तस्रोत कहलाने लगा और आगे चलकर इसका नाम बदलकर सरसोता हो गया।
मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) सहसवान- बदायूं 9719216984

