बार और बेंच के सामंजस्य के लिए अधिवक्ताओं से वार्ता के द्धार खुले है। उपजिला मजिस्ट्रेट महिपाल सिंह

मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) सहसवान- बदायूं 9719216984

सहसवान। तहसील कार्यालय के न्यायालय में अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए अधिवक्ताओं द्धारा 2 जुलाई से की जा रही अनिश्चितकालीन कलम बंद हड़ताल को उप जिला मजिस्ट्रेट महिपाल सिंह ने बेबुनियाद बताया तथा कहा कि वह बार के साथ वार्ता करने को तैयार हैं। परंतु कई बार निमंत्रण पत्र वार्ता हेतु देने के बाद भी बार  का कोई पदाधिकारी एवं अधिवक्ता वार्ता करने हेतु नहीं आया उन्होंने कहा की बार और बेंच एक सिक्के के दो पहलू हैं बार के बिना बैंक अधूरी है। और बेंच के बिना बार अधूरी है। जब तक दोनों लोगों का सामान्यजस नहीं होगा। न्यायिक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती इसे आगे बढ़ाने के लिए बैंक के लिए वार्ता के दरबार हमेशा खुले हैं।

उपजिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अधिकार है। किन्ही मुद्दों पर न्यायिक प्रक्रिया में अधिवक्ता अधिवक्तागण नाराज हो सकते हैं। परंतु न्यायिक प्रक्रिया में उपजिला मजिस्ट्रेट न्यायालय से न्याय न मिलने पर वह आगे के न्यायालय में वाद दायर कर सकते हैं।  परंतु आरोप लगाकर न्यायालय की कार्यों में बाधा उत्पन्न की जाए यह निंदनीय है। उन्होंने कहा की बेंच हमेशा बार के साथ रही ही रहेगी हम शासन की सीमा के अंतर्गत कार्य करने को वाध्य है।परंतु न्याय की कुर्सी पर बैठकर जो भी निर्णय होता है। वह न्याय की प्रक्रिया के अंतर्गत होता है। न्याय न्याय की प्रक्रिया के अंतर्गत किया गया निर्णय से संतुष्ट न होने पर वादी एवं प्रतिवादी का उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकते हैं।  उन्होंने कहा कि उन्होंने बार एसोसिएशन सहसवान सेंट्रल बार एसोसिएशन सहसवान को लिखित एवं मौखिक रूप में पत्र भेजकर कई बार वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। परंतु वार्ता को भेजे गए पत्र पर दोनों एसोसिएशन से कोई भी पदाधिकारी एवं अधिवक्ता वार्ता करने हेतु उपस्थित नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि अधिवक्तागण वार्ता में अपनी समस्या अपनी मांगें रख सकते हैं। जो न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगी उसे हम मानने को तैयार हैं परंतु हटधर्मी मनमानी करना यह शोभा नहीं देता। उन्होंने एक बार पुन: बार एसोसिएशन सेंट्रल बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों से व वरिष्ठ अधिवक्ताओं से अनुरोध किया है। कि वह बार और बेंच के संबंधों को मजबूत बनाने हेतु वार्ता करने के लिए आमंत्रित हैं। वह बेंच के समक्ष आकर अपनी बात कह सकते हैं। अपनी समस्या रख सकते हैं। ऐसी कोई समस्या नहीं है। जिसका निदान नहीं है। परंतु समस्या न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत होनी चाहिए। न्यायिक प्रक्रिया से बाहर की समस्या का निदान न्याय की कुर्सी पर बैठकर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने समस्त अधिवक्ताओं से बेंच का सहयोग करने की अपील की है।

मुकीम अहमद अंसारी संवाददाता (एसएम न्युज24 टाइम्स) सहसवान- बदायूं 9719216984

 

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