सीरिया के पटल पर भिड़ सकते हैं तुर्की और रूस, बेहद ख़तरनाक खेल में पड़ गए हैं अर्दोग़ान, नुक़सान से बचना है तो सीरियाई अधिकारियों से हर स्तर पर बात करे तुर्की!
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने सीरिया की सरकार को फ़रवरी महीने के अंत तक का समय दिया कि वह इस अविध में अपनी सेना पश्चिमोत्तरी सीरिया के भीतर तुर्की की सैनिक चेक पोस्टों से दूर कर ले।
इस चेतावनी का जवाब सीरियाई सेना ने इस तरह दिया कि इदलिब शहर के आस पास के इलाक़ों में और तेज़ी से प्रगति करते हुए पहले 20 शहरों और गावों पर नियंत्रण स्थापित किया और उसके बाद स्ट्रैटेजिक महत्व रखने वाले सुराक़िब शहर से आतंकियों को खदेड़ कर उस पर क़ब्ज़ा कर लिया।
शायद अर्दोग़ान यह भूल गए हैं कि इदलिब का इलाक़ा जिस पर आतंकी संगठन अन्नुस्रा फ़्रंट ने क़ब्ज़ा कर रखा है सीरिया की धरती का भाग है यह तुर्की की ज़मीन नहीं है अतः सीरियाई सेना को पूरा अधिकार है कि इस इलाक़े को आतंकियों के क़ब्ज़े से आज़ाद कराए बिल्कुल उसी तरह जिस तरह तुर्क सेना को कुर्दों के अलगाववादी अभियान को नाकाम बनाने का अधिकार है।
सीरियाई सेना के अधिकारी ने कहा कि सीरिया की धरती पर तुर्क सैनिकों की उपस्थिति ग़ैर क़ानूनी है और सीरियाई सेना तुर्क सैनिकों को अपनी धरती से निकाल बाहर करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
अर्दोग़ान का कहना है कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतीन को सूचित कर दिया है कि अगर दोबारा सीरियाई सेना ने तुर्क सैनिकों पर हमला किया तो हम पूरी ताक़त से जवाब देंगे अलबत्ता उन्होंने यह नहीं बताया कि इसके जवाब में पुतीन ने क्या कहा। निश्चित रूप से पुतीन ने इस धमकी को ख़ारिज कर दिया होगा क्योंकि रूस के समन्वय से सीरियाई सेना ने तुर्क सैनिकों की चेकपोस्टों पर हमला किया है जो सीरिया की धरती के भीतर बनाई गई हें।
सीरिया ईरान और रूस ने 18 महीने तक सब्र किया और तुर्की को सूची में सितम्बर 2018 में होने वाले समझौते पर अमल करने का मौक़ा दिया। समझौते में साफ़ कर दिया गया था कि तुर्की अपने समर्थन वाले आतंकी संगठनों को संभालेगा और इदलिब का इलाक़ा सीरियाई सरकार के नियंत्रण में वापस आएगा। तुर्की ने इस मामले में लगातार टालमटोल की।
सीरिया और रूस ने तुर्की को इदलिब और आसपास के इलाक़ों में 12 स्थानों पर चेकपोस्टें बनाने की अनुमति दी थी और अर्दोग़ान की हर प्रकार की आशंका दूर करने की कोशिश की गई थी जिसमें तुर्की की सीमा के क़रीब से कुर्द फ़ोर्सेज़ को दूर करना भी शामिल है मगर तुर्की ने अपने वादों पर अमल नहीं किया बल्कि उसके समर्थन वाले आतंकी संगठन अन्नुस्रा फ़्रंट ने लाज़ेक़िया में स्थित रूस की छावनी पर ड्रोन हमले किए।
इस समय तुर्की के संबंध सीरिया से ज़्यादा रूस के साथ तनावपूर्ण हो गए हैं। अर्दोग़ान ने यूक्रेन जाकर वहां ड्रोन विमान बेचने का सौदा किया और क्रीमिया का इलाक़ा यूक्रेन को वापस किए जाने का समर्थन किया जिसका रूस ने विलय कर लिया है।
टीकाकारों के अनुसार अर्दोग़ान से यह बड़ी ग़लती हुई कि क्रीमिया और यूक्रेन के मुद्दे का प्रयोग करके उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतीन को आक्रोश दिलाने की कोशिश की।
अर्दोग़ान दरअस्ल रूस और अमरीका के बीच टकराव का फ़ायदा उठाने के मक़सद से इस प्रकार के पत्ते खेल रहे हैं यही वजह है कि अमरीकी विदेशमंत्री पोम्पेयो ने इदलिब के मामले में तुर्की का समर्थन किया है। मगर अर्दोग़ान को याद रखना चाहिए कि अमरीका को तुर्की से कोई दिलचस्पी नहीं है वह बस चाहता है कि तुर्की रूस से एस-400 का सौदा समाप्त कर दे। रूस से तनाव बढ़ा तो निश्चित रूप से तुर्की को नुक़सान उठाना पड़ेगा। संकट का समाधान यही है कि तुर्की की सरकार सीरियाई अधिकारियों से हर स्तर पर बात करे और दोनों देशों के बीच हुए सीमावर्ती मामलों के समझौते को फिर जीवित करे यही सबसे अच्छा रास्ता हो सकता है।

