बाराबंकी से जुड़ी राजनीति के एक पूरे अध्याय का हुआ पटाक्षेप सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन से शोक में डूबे समर्थक, दी श्रद्धांजलि
बाराबंकी: रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500
बाराबंकी। समाजवादी पार्टी के संस्थापक, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना सुनकर कार्यकर्ताओं, समर्थकों व आम जनमानस में शोक की लहर दौड़ गई। मुलायम सिंह यादव का बाराबंकी जिले से काफी गहरा रिश्ता था। उनका कहना था कि जब बाराबंकी में सपा की लहर होती है तो सूबे में सपा की सरकार आती है। इसी कारण जब उनके समय विधानसभा के चुनाव होते थे तो मुलायम सिंह यादव हर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभाएं करने जरूर पहुंचते थे। जिससे उनका कोई विधायक हारने पाए। मुलायम सिंह यादव का जिले के स्वर्गीय बेनी प्रसाद वर्मा, स्व. रामसेवक यादव, स्व. अनंतराम जायसवाल, स्व. गयासुद्दीन ंिकदवई, राजनाथ शर्मा, छोटेलाल यादव, पूर्व विधायक सरवर अली खान, पूर्व सांसद रामसागर रावत सरीखे कई राजनेता से निजी संबध रहे। डॉ राममनोहर लोहिया के समाजवाद के सपनों को और उनकी विरासत को शिखर तक पहुंचाने में नेताजी एक नायक की भूमिका निभाई। उन्होंने जो कहा, वो किया। मुलायम सिंह यादव के इसी गुण के कारण लोग आज भी इन्हें जबान का धनी कहते थे। देश के सबसे बड़े सूबे के तीन बार मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री जैसे अन्य पदों पर रहकर देश सेवा को नारायण सेवा मानने वाले नेताजी ने कई ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जिसके लिए आज भी उन की मिसाल दी जाती है। मुलायम सिंह यादव वास्तव में जननेता थे। वह ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने समाजवादी पार्टी को जोड़कर रखा है। उनका कहा किसी ने कभी अनसुना नहीं किया। उनकी एक आवाज पर आज भी लाखों की संख्या में भीड़ जुट जाती थी। बाराबंकी से नेताजी के गहरा रिश्ता था। समाजवादी आंदोलन में नेताजी मुलायम सिंह यादव के साथ रहे गांधीवादी राजनाथ शर्मा जी उन्हें लोहिया का अनुयायी मानते थे। हिंदी आंदोलन, किसान आंदोलन, आपातकाल जैसे कई सत्याग्रहों में सहयात्री रहे है। स्वदेशी और भारत, पाक, बांग्लादेश महासंघ के मुद्दों से संसद को हमेशा गर्म करने का काम किया। वह हमेशा चीन और अमेरिका के खिलाफ मुखर रहे। सोमवार की सुबह जैसे ही दिल्ली के मेदांता अस्पताल में पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन की सूचना मिली उनसे जुड़े नेता व पार्टी के पदाधिकारियों के साथ अन्य लोगों की आंख से आंसू छलक पड़े।
भावुक हुए पूर्व मंत्री अरविन्द सिंह गोप
समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद सिंह गोप ने कहा कि पार्टी के लिए बड़ी क्षति हुई है। पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव जैसा नेता अब पैदा नही होगा। जिन्होंने हमेशा नवजवानों को पार्टी से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। और कार्यकर्ता व पदाधिकारी की मेहनत देखकर उसको नेता, विधायक व मंत्री तक बनवाते थे। आज हम लोगों ने अपना अभिभावक खो दिया है। अरविंद सिंह गोप ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता के लिये यह बहुत बड़ा सदमा और दुख का समय है। मुलायम सिंह यादव हम लोगों के अभिभावक थे। आज हम लोग जो भी हैं केवल उन्हीं की बदौलत हैं। आज हम सब अपने नेता को खोकर बहुत ज्यादा दुखी हैं। हमारी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि नेताजी की आत्मा को शांति मिले और समाजवादी पार्टी परिवार इस सदमे को बर्दाश्त करे। नेताजी हमारे लिये हमेशा अमर रहेंगे।
लोहिया की नीतियों के उत्तराधिकारी थे मुलायम

डॉ. राममनोहर लोहिया के साथी रहे समाजवादी चिन्तक राजनाथ शर्मा ने कहा कि नेताजी के जाने के साथ ही ज़मीन से जुड़ी राजनीति के एक भरे पूरे अध्याय का पटाक्षेप हो गया। हालांकि वे लम्बे वक्त से बीमार थे पर ऐसे प्रबल ऊर्जावान व्यक्तित्व का लम्बे समय तक राजनीति से विरक्त होकर पड़े रहना अच्छा नही लगता था। मुलायम सिंह यादव का निष्क्रिय और लाचार पड़े रहने का नाम नही था। वह शोषित और वंचित तबके के हक़ में राजनीति की विशाल करवट का नाम थे। इस देश की राजनीति जब भी ऐसी कोई करवट लेगी, नेताजी बहुत याद आएंगे।
छोटेलाल की सभा में हेलीकाप्टर से कूदे मुलायम
2002 का विधानसभा चुनाव चल रहा था। बाराबंकी जिले में चुनाव प्रचार का अंतिम दिन था। समाजवादी पार्टी से छोटेलाल यादव प्रत्याशी बनाए गए थे। मुलायम सिंह यादव को इस बात की भनक लग गई थी कि अगर यहां पर जनसभा ना हुई तो छोटे लाल यादव को संग्राम सिंह वर्मा चुनाव हरा सकते हैं। शाम का समय हो रहा था हेलीकॉप्टर का पायलट हेलीकॉप्टर उतारने के लिए राजी नहीं था। शहर के जीजीआईसी मैदान में हेलीकॉप्टर ने एक दो राउंड लगाए। फिर समय ज्यादा होने के कारण हेलीकॉप्टर शहर से घूमता हुआ लखनऊ की तरफ रवाना हो गया। लेकिन इन 5 मिनटों में सपा के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कड़ा फैसला लेते हुए पायलट से कहा कि यह जनसभा हमको करनी है। पायलट से पूछा कितने नीचे तक हेलीकॉप्टर उतर हो सकता है। पायलट ने कहा 5 से 7 फिट नीचे तक हेलीकॉप्टर हो सकता है। जमीन से जुड़े नेता मुलायम सिंह यादव ने कहा ठीक है हेलीकॉप्टर सफेदाबाद से फिर आसपास से लौटकर जनसभा में आया। और हेलीपैड ना होने के बाद भी किनारे नीचे हुआ। और मुलायम सिंह यादव ने हिम्मत दिखाते हुए वहीं से छलांग लगा कर नीचे कूद पड़े। मुलायम सिंह का यह साहस और हिम्मत को देखकर कार्यकर्ताओं ने मुलायम सिंह जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। और मुलायम सिंह ने एक घंटे तक अपने भाषण में छोटे लाल यादव को विधायक बनाने के लिए लोगों से अपील की। तभी 2002 के चुनाव में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव बने थे।
कमाल की थी बेनी-मुलायम की जोड़ी
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय बेनी प्रसाद वर्मा समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य थे। बेनी प्रसाद वर्मा को मुलायम सिंह यादव अपना छोटा भाई मानते थे। दोनों नेताओं में पिछड़ी जातियों को आगे बढ़ाने की ललक थी। गांव की धूल और धुएं की पृष्ठभूमि से उठकर, राजनीति के शिखर पर पहुंचकर नेताजी और बेनी बाबू ने यह साबित कर दिया कि इरादे मजबूत होने से सफलता जरूर मिलती है। दोनों नेताओं ने तीन दशकों तक सूबे की सियासत में नए अध्याय का सृजन किया।
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