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इस अवसर पर वैद्यों ने बताया कि भगवान धन्वंतरि जी समुद्र मंथन के वक्त समुद्र से अमृत से भरा कलश लेकर अवतरित हुए थे। अर्थात निरोगी स्वस्थ समाज ही असली समृद्धि समाज की निशानी है। आज का यह पर्व रोग रहित स्वस्थ्य जीवन की कामना का महापर्व है। निरोगी शरीर ही जीवन का सबसे बड़ा धन है, तभी हम इसे धनतेरस कहते हैं। इस अवसर पर वैद्यों द्वारा लाई गई आयुर्वेदिक वनस्पति (जड़ी बूटी) का प्रदर्शन व उसके गुणों की चर्चा की गई। रज्जाकपुर से आये वैद्य एस विशाल वर्मा ने इस महामारी के दौर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गुडची, संजीवनी घनवटी, चिरयता, तुलसी, कुटकी आदि का प्रयोग बताया। डॉ अंबरीश वर्मा ने मानव शरीर पर औषधियों के प्रयोग के साथ-साथ पंचकर्म के प्रयोग पर बल दिया। वैद्य यू डी मिश्रा ने अनेक जटिल बीमारियों पर भु-ऑवलो व सर्वसुलभ नीम की महत्ता बताई। डॉ आशीष वर्मा ने बदलते मौसम के दुष्प्रभाव पर गिलोय व तुलसी के रस का प्रयोग करने की सलाह दी। डॉ अनूप ने नीम व पपीते का उपयोग डेंगू में गिरते प्लैटलट्स को बढ़ाने के लिए सहायक बताया। डॉ एन के चौधरी ने पीपल के कोमल पत्तों से हृदय चिकित्सा प्रयोग की अत्यंत सरल विधि विस्तार से बताई। समारोह में मुख्य रूप से डॉ आशीष वर्मा, डॉ अवस्थी, डॉ नवदीप, सरायु कंपनी के डॉक्टर राकेश, इंद्रजीत, सोनू, देवांशी, वैभवी, शुभी, प्रासुक नीलू आदि उपस्थित रहे। अंत में मनोहर दास पदम कुमार जैन के प्रबंधक शरद कुमार जैन ने वैद्यों का स्वागत करते हुए प्रसाद वितरित किया। साथ ही सभी को आयुर्वेदिक औषधि एवं पौधे वितरित कर जयंती की बधाई दी गई
।सुहेल अंसारी संवाददाता नगर बाराबंकी एसएम न्यूज़24टाइम्स 8081991270
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