सीरियाई सेना ने सुराक़िब शहर से चरमपंथियों और तुर्क सैनिकों को खदेड़ा, अर्दोग़ान के सैनिक आप्रेशन को बड़ा झटका, इस बड़ी कामयाबी में क्या है हिज़्बुल्लाह और ईरान का रोल?

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

सीरियाई सेना ने इदिलब के इलाक़े में लड़ाई जारी रखते हुए स्ट्रैटेजिक महत्व रखने वाले सुराक़िब शहर को उग्रवादी संगठनों और तुर्क सेना के नियंत्रण से आज़ाद करा लिया जो रणनैतिक मंच पर सीरिया की बड़ी कामयाबी है।
इस शहर पर तुर्की द्वारा समर्थित उग्रवादी संगठनों का नियंत्रण तीन दिन से ज़्यादा जारी नहीं रह सका और सीरियाई सेना ने वहां मौजूद चरमपंथियों को कुचलते हुए शहर को आज़ाद कराया और दमिश्क़ को हलब से जोड़ने वाले राजमार्ग इसी तरह हलब को लाज़ेकिया से जोड़ने वाले राजमार्ग को फिर से खोल दिया।
चरमपंथी संगठनों के प्रवक्ता नाजी मुसतफ़ा ने फ़्रांस प्रेस से बातचीत में स्वीकार किया कि सीरियाई सेना अब सुराक़िब शहर का नियंत्रण अपने हाथ में ले चुकी है। तुर्की ने अपनी स्थिति मज़बूत करने के लिए 15 हज़ार सैनिक और 3 हज़ार बक्तरबंदी गाड़ियां और टैंक तैनात किए थे लेकिन सीरियाई सेना को कोई रोक नहीं पाया।
हिज़्बुल्लाह के 1000 जवानों का सुराक़िब पहुंचना और वहां जारी लड़ाई में मोर्चा संभालना सीरियाई सेना की इस सफलता का बड़ा कारण है। हिज़्बुल्लाह ने लेबनान की सीमा के निकट क़ुसैर शहर को 2015 में चरमपंथियों से आज़ाद कराते समय भी इसी तरह की ताक़त और रणनैतिक सूझबूझ दिखाई थी।
तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान ने सीरिया के भीतर जारी अपने सैनिक आप्रेशन का नाम स्प्रिंग शील्ड रखा है और इस आप्रेशन से उन्होंने बड़ी उम्मीदें लगा रखी हैं लेकिन सुराकिब में जो हुआ वह उनके सैनिक आप्रेशन के लिए बहुत बड़ा झटका है।
तुर्की के रक्षा मंत्री ख़लूसी आकार ने कहा कि तुर्क सेना ने सीरिया के दो युद्धक विमान, आठ हेलीकाप्टर और दर्जनों टैंक ध्वस्त कर दिए हैं लेकिन सुराक़िब की घटना इन सब पर भारी है। सीरियाई टीवी चैनल ने सुराक़िब के भीतर मौजूद सीरियाई सैनिकों का वीडियो जारी किया है जिससे सीरियाई सैनिकों का मनोबल बहुत अधिक बढ़ गया है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतीन ने तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान से मुलाक़ात को ग्रीन सिग्नल तब दिया जब सुराक़िब शहर की सफलता सुनिश्चित हो गई। यानी पुतीन चाहते हैं कि इदलिब के बारे में बातचीत में अर्दोग़ान किसी तरह मज़बूत पोज़ीशन में न हों।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रूस अब सीरिया में तुर्की के युद्धक विमानों की सुरक्षा की गैरेंटी नहीं दे सकता क्योंकि सीरिया ने उत्तरी इलाक़ों में अपनी वायु सीमा बंद कर दी है। इसका मतलब यह है कि सीरिया और रूस के एयर डिफ़ेन्स सिस्टम इस इलाक़े में तुर्की के युद्धक विमानों को मार गिराएंगे। यहीं से समझा जा सकता है कि दो दिन में तुर्की के आठ ड्रोन विमान क्यों गिरे।
अर्दोग़ान ने रूस से मांग की थी कि वह बीच से हट जाए और तुर्की को सीरियाई सेना से निपट लेने दे इसके जवाब में रूस की ओर से जो बयान आए हैं वह ज़ाहिर करते हैं कि अर्दोग़ान हालात को समझ नहीं पा रहे हैं इसीलिए इस तरह की मांग कर रहे हैं।
अर्दोग़ान ने जिस आप्रेशन का एलान किया है वह वर्तमान हालात में किसी भी नतीजे तक नहीं पहुंच सकेगा क्योंकि रूस व्यापक रूप से सीरियाई सेना का समर्थन कर रहा है और हिज्बुल्लाह के जवान मोर्चे पर पहुंच चुके हैं। ईरान के सैनिक सलाहकार भी मोर्चा संभाले हुए हैं। तुर्की की यह हालत है कि उसके सारे घटकों ने उसका साथ छोड़ दिया है न नैटो सामने आया है और न ही अमरीका मदद के लिए तैयार है।
हम एक बार फिर कहते हैं कि ईरान के राष्ट्रपति ने तेहरान या मास्को में ईरान, सीरिया और तुर्की की शिखर बैठक का जो प्रस्ताव दिया है वह अर्दोग़ान के सामने ख़ुद को और अपने देश को संकट से बचाने का बेहतरीन प्रस्ताव है, वह चाहें तो इसमें रूस को भी शामिल कर लें।
अर्दोग़ान के लिए यह समझना ज़रूरी है कि वह एक ही समय में रूसी राष्ट्रपति पुतीन और आतंकी संगठन अन्नुस्रा फ़्रंट के घटक नहीं बन सकते जिन्हें रूस के साथ ही दूसरे देश भी आतंकी संगठन कहते हैं।

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