भीषण गर्मी में सुहागिनों ने रखा निर्जला वट सावित्री व्रत पति की दीर्घायु के लिए की पूजा
बाराबंकी: रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500
बाराबंकी। शुक्रवार को सौभाग्य, दीर्धायु और आरोग्य का वरदान देने वाला वट सावित्री व्रत रखकर पूजन अर्चन कर अपने पति की दीर्घायु की कामना की। वट सावित्री व्रत के दिन शादीशुदा महिलाएं बरगद के पेड़ और देवी सावित्री की पूजा कर पति की सलामती और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती है. ये व्रत करवा चौथ के समान पुण्यफलदायी माना गया है, पौराणिक मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन ही यमराज से देवी सावित्री के पति सत्यवान को पुनरू जीवनदान दिया था इसलिए हर सुहागिन के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है. अखंड सौभाग्य की कामना से वट सावित्री व्रत पर सुहागिनें एक दूसरे को शुभकामनाएं संदेश भेजकर इस व्रत की बधाई देती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष के छाल में विष्णु, जड़ों में ब्रह्मा और शाखाओं में शिव जी विराजमान होते हैं. ब्रह्मा-विष्णु-महेश के वास के चलते इसे देव वृक्ष कहा जाता है इसी वजह है कि इस वृक्ष को ज्ञान, निर्वाण व दीर्घायु का पूरक माना गया है. इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा आदि सुनने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यह धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। शुक्रवार को महिलाओं ने व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा अर्चना करके अपने पति की सलामती व दीर्घायू होने की कामना की।
बरगद और पीपल के नीचे पूजा का विधान
सनातन धर्म को मानने वाली महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पति पर आए संकट दूर हो जाते हैं। और वह दीर्घायु प्राप्त करता है। दांपत्य जीवन में आने वाले नाना प्रकार के कष्ट भी इस व्रत को रखने से दूर हो जाते हैं। इस व्रत को रखने वाली सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष 7 से 13 परिक्रमा और पीपल की 113 फेरी लगाकर विधिवत पूजा-अर्चना करती हैं।
किशोरियां भी करती हैं पूजा
अविवाहित युवतियां भी अपने भावी जीवन को सुखद बनाने के लिए इसकी पूजा-अर्चना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री व्रत व सोमवती अमावस्या का व्रत रखने वाली युवतियों को उनके मनवांछित वर व सफल वैवाहिक जीवन की कामना पूरी होती है। जिन युवतियों का विवाह किन्ही कारणों से रुक जाता है। इस व्रत रखने से उनके विवाह में आने वाली प्रत्येक रुकावट को दूर कर मनवांछित वर प्रदान करता है।
सावित्री-सत्यवान की कथा का विशेष महत्व
नगर पुरोहित पंडित अश्वनी कुमार मिश्र बताते हैं कि इस दिन सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने का विशेष महत्व है। श्रद्धा पूर्वक कथा सुनने वाले लोगों के मनवांछित फलों की पूर्ति भगवान हरि स्वयं करते हैं। सती सावित्री देवी ने इसी दिन यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी। इस बार आज के दिन नक्षत्रों का अच्छा संयोग बना है। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने सुबह से सर्वार्थ सिद्धि योग में वटवृक्ष की फेरी लगाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।बाराबंकी: रिपोर्ट शमीम अंसारी: एसएम न्यूज24टाइम्स 9415526500

