कश्मीर, फ़ारूक़ अब्दुल्लाह रिहा, कोई राजनैतिक बयान नहीं किया

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

अल्ताफ़ बुख़ारी से जब पत्रकारों ने पार्टी के गठन के वक़्त पर सवाल किया और पूछा कि कश्मीर के बड़े नेता हिरासत में हैं तो उन्होंने इस सवाल को टालते हुए कहा, “मैं इस तरह की बहस में नहीं पड़ना चाहता हूं।” जबकि जेकेएपी के एक अन्य नेता ग़ुलाम हसन मीर ने कहा है, “हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की तैयारी कर रहे हैं।” इस पर एक टीकाकार का कहना है कि, “ऐसे समय में जब कुछ भी कहने के लिए मामला दर्ज किया जाता है, गिरफ़्तारी की जाती है और तो ऐसे में सरकार की सुविधा के बिना कोई भी दल अस्तित्व में नहीं आ सकता है।” कश्मीर में वामपंथी नेता यूसुफ़ तारिगामी भी टीकाकार के रुख का समर्थन करते हुए कहते हैं कि यह स्पष्ट है कि भारत सरकार के इशारे पर नई पार्टी की स्थापना की गई है हालांकि इससे कुछ हासिल नहीं होने वाला है। वह कहते हैं, “इसमें केंद्र का समर्थन शामिल है, लेकिन जब सभी राजनीतिक नेता हिरासत में हैं, तो यह पार्टी या केंद्र सरकार क्या करना चाहती है? क्या इससे राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने में मदद मिलेगी? क्या यह पिछले कई महीनों से कश्मीर में राजनीतिक खालीपन भरने में मदद करेगा? मुझे लगता है कि यह उपाय बेकार हैं।”
इस बीच ऐसी ख़बरें भी आ रही हैं कि भारत सरकार ने कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्लाह की रिहाई का आदेश जारी कर दिया है। इस ख़बर के बाद कश्मीर में नेश्नल कांफ्रेंस के कार्यकर्ताओं में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है। वहीं हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कपिल सिब्बल ने भी संसद में बहस के दौरान भारतीय गृह मंत्री से पूछा था कि जब एक ओर आपकी सरकार कश्मीर के प्रमुख नेताओं, कि जिसमें तीन-तीन इस राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं, उनको केवल इसलिए महीनों से हिरासत में रखा जाता है क्योंकि उनके बाहर रहने से और उनके बयानों से कश्मीर के हालात ख़राब होने की आशंका है, तो फिर मोदी सरकार ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ क्यों कार्यवाही नहीं करती जो उनकी पार्टी के हैं और जिनकी वजह से दिल्ली में हुई संप्रदायिक हिंसा में दर्जनों लोगों की हत्या हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए हैं। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भारत में जो राजनीतिक स्थिति है वह अब किसी से छिपी नहीं है और यह देश जो दुनाया के महान लोकतांत्रिक देश के तौर पर जाना जाता है वह मोदी सरकार के आने के बाद से दुनिया के सबसे बड़े राज शाही शासन की ओर जा रहा है।

 

जम्मू-कश्मीर पूर्व मुख्यमंत्री और नेश्नल कांफ़्रेंस के नेता फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने रिहाई के बाद कहा कि आज मैं आज़ाद हूं। मेरे पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं हैं। अब मैं संसद जा सकता हूं।
रिहाई के बाद उन्होंने कहा कि मैं राज्य और देश की जनता और नेताओं का शुक्रगुज़ार हूं, जिन्होंने मेरी आज़ादी के लिए आवाज़ उठाई। यह आज़ादी तभी पूरी होगी जब सभी नेताओं को रिहा कर दिया जाएगा। मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार सभी नेताओं की रिहाई के लिए जल्द क़दम उठाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक सभी नेताओं को रिहा नहीं कर दिया जाता है, मैं किसी भी राजनीतिक मुद्दें पर नहीं बोलूंगा।
5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से वहां के स्थानीय नेताओं को नजरबंद कर लिया गया था। पिछले साल 4 अगस्त से फ़ारूक़ अब्दुल्लाह नज़रबंद थे और प्रशासन के पीएसए हटाने के करीब सात महीने बाद उन्हें आज़ाद किया है।

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