कृषि विभाग द्वारा पराली प्रबंधन हेतु कृषकों को जागरूक करने के लिए नियमित रूप से कार्यक्रम किए जा रहे आयोजित
बाराबंकी, 24 अक्टूबर। ज़िलाधिकारी श्री सत्येंद्र कुमार ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं की प्रशासन स्तर पर कड़ी निगरानी की जा रही है और सेटेलाइट के माध्यम से भी इसकी सूचना प्राप्त की जा रही है। उन्होंने कहा कि पराली को जलाने पर नियमानुसार सख़्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान भाइयों को पराली के पर्यावरणीय प्रबंधन के दृष्टिकोण से समुचित साधन एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
ज़िलाधिकारी ने कहा कि जनपद में पराली जलने की घटनाओं पर नियंत्रण एवं कृषकों को जागरूक करने के लिए नियमित रूप से कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज 24 अक्तूबर को उप कृषि निदेशक एवं तहसीलदार नवाबगंज द्वारा विकास खण्ड देवा के ग्राम कुम्हंरावां विकास खण्ड बंकी के ग्राम जसमण्डा आदि का भ्रमण कर कृषकों से वार्ता की गई एवं उन्हें पराली प्रबन्धन के सम्बन्ध में जागरूक किया गया। किसान भाइयों को अवगत कराया गया कि खेतों में पराली/फसल अवषेश जलाना दण्डनीय अपराध है एवं पराली जलाने की घटना पाये जाने पर नियमानुसार अर्थदण्ड एवं अन्य कार्यवाही का भी प्राविधान है। ग्राम जसमण्डा एवं कुम्हरांवा में पराली जलाने वाले कृषकों पर नियमानुसार अर्थदण्ड भी अधिरोपित किया गया।
उप निदेशक, कृषि के अनुसार अब तक पराली जलाने की 40 सूचित घटनाओं के सापेक्ष 22 घटनाओं की पुष्टि हुई है और जिसके सापेक्ष सम्बन्धित व्यक्तियों पर नियमानुसार 60000 रुपए का अर्थदण्ड लगाया गया है। इसके अतिरिक्त कूड़ा जलाने वाले लोगों पर भी रूपए 15000 का अर्थदण्ड लगाया गया है। इस प्रकार कुल अधिरोपित अर्थदण्ड 70000 रुपए के सापेक्ष शत- प्रतिषत वसूली भी कराई गई है। घटना की पुनरावृत्ति पाये जाने पर प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्यवाही भी कराई जायेगी।
उप निदेशक, कृषि के अनुसार पराली जलाने के सम्बंध में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति हेतु अर्थदण्ड की व्यवस्था इस प्रकार है-
1-कृषि भूमि का क्षेत्रफल 02 एकड़ से कम होने की दशा में अर्थदण्ड 2500 रुपए प्रति घटना।
2-कृषि भूमि का क्षेत्रफल 02 एकड़ से अधिक किन्तु 05 एकड़ से कम होने की दशा में अर्थदण्ड 5000 रुपए प्रति घटना।
3-कृषि भूमि का क्षेत्रफल 05 एकड़ से अधिक होने की दशा में अर्थदण्ड 15000 रुपए प्रति घटना।
उप निदेशक, कृषि ने भी समस्त किसान भाइयों से अपील की है कि अपने खेत में पराली कदापि न जलायें एवं स्ट्रारीपर के साथ ही अपने खेतों में कम्बाइन मशीन से कटाई सुनिश्चित करायें ताकि उन्हें किसी प्रकार की विधिक कार्यवाही का सामना न करना पड़े एवं पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके। साथ ही जनपद के राजकीय कृषि बीज भण्डारों के माध्यम से निःशुल्क वेस्ट डिकम्पोजर प्राप्त कर फसल अपशिष्ट को खेतों में ही डिकम्पोज कर उससे खाद बनाएं।
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