बड़ागाँव की ऐतिहासिक रामलीला (धनुषयज्ञ) मेले का आयोजन

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी। आजादी पूर्व लुक्के की रौशनी में शुरू होने वाली सात दशक पुरानी ग्राम बड़ागाँव की ऐतिहासिक रामलीला (धनुषयज्ञ) की शुरुआत सोमवार को तिलवा पूजन के साथ शुरू हो गयी है। 5 दिवसीय धनुषयज्ञ मेला में ताड़कावध, फुलवारी लीला, धनुषभंग एव बारात भृमण किया जायेगा।

बुजुर्गों के अनुसार आजादी से पूर्व वर्ष 1945 में गांव के बुजुर्ग पण्डित राम आधार, पण्डित शिवदुलारे शुक्ला, जग्गनाथ वर्मा, छेदीलाल वर्मा, पण्डित चन्द्रशेखर, राम भरोसे वर्मा द्वारा लुक्के की रोशनी में स्थानीय कलाकारों द्वारा धनुषयज्ञ मेले की शुरुआत की थी धनुषयज्ञ के संस्थापक सदस्य आज हम लोगों के बीच है तो नही परन्तु उनकी स्मृतियां आज भी जाग्रत है। हिन्दू मुस्लिम के सहयोग से लगने वाले धनुषयज्ञ मेले में मरहूम हाजी शहबान का विशेष सहयोग रहता था तिलवा पूजन से पूर्व हाजी शहबान सामियाना एव पोलर लाईट की तैयारी में जुट जाते थे और पूरी लगन के साथ सामियाना कनात लगाते थे। प्रति वर्ष कड़ाके की ठण्ड में होने वाली धनुषयज्ञ को देखने के लिए स्व0 नसीर उर रहमान किदवाई सहित मुस्लिम समाज के बहुत से लोग भी पूरी रात्रि बैठे रहते थे।
सात दशक पुरानी धनुषयज्ञ रामलीला आज इलेक्ट्रनिक लाइटों से जहाँ जगमग रहती है वही सामियानो की जगह भव्य पिंडालो ने ले ली है। तथा पहले समस्त किरदार गांव के ही कलाकारों द्वारा निभाये जाते थे परन्तु आहिस्ता आहिस्ता किरदारों में दरभंगा से आने वाली नाट्य कला के कलाकारों द्वारा निभाया जाने लगा है फिर भी गांव के रमेश गुप्ता का राजा जनक का किरदार आज भी लोगो रास आ रहा है। इसी तरह के अवधराम गुप्ता, सुबोध कुमार श्रीवास्तव, भरत गुप्ता, श्यामाचरण गुप्ता के किरदारों की जमकर सराहना होती है। सोमवार को तिलवा पूजन के साथ धनुषयज्ञ मेले की शुरुआत हो गयी है। मंगलवार को तड़कावध, बुधवार को नगर दर्शन फुलवारी लीला , गुरुवार को धनुषभंग राम विवाह एव शुक्रवार को पूरे गांव में राम बारात के भृमण के बाद रामलीला का समापन किया जायेगा। रामलीला कमेटी के पदाधिकारी सहयोगियों के साथ रामलीला धनुषयज्ञ की तैयारियों को अंतिम रूप देने के पूरे जोश के साथ जुटे हुए है।

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