जैदपुर बाराबंकी। क़स्बा बड़ागांव में चल रही रामलीला (धनुषयज्ञ) के चौथे दिन सीता स्वयंबर व धनुष भंग लीला का समापन कलेवा के बाद हुआ। व्यास अनन्त वर्मा के मुखार विंदु द्वारा मंचन किया गया , सीता स्वयंबर में आये रावण और बाणासुर में जमकर वाक युद्ध हुआ, जिसमें रावण के शास्त्र ज्ञान को बाणासुर ने बड़ी ही निपुणता से तर्क पूर्ण संवाद कर उपस्थित दर्शकों को रोमांचित कर दिया। रावण- बणासुर के वाकयुद्ध का दर्शकों ने भी आनन्द उठाया! सीता के योग्य वर नही मिलने पर पिता के रूप में राजा जनक के करूण विलाप ने दर्शकों अश्रुपूरित कर दिया | गुरू विश्वामित्र का आदेश प्राप्त कर भगवान राम ने जैसे ही शिव धनुष का खण्डन किया तो समूचे दर्शक दीर्घा में जय श्रीराम का उद्घोष गूंजने लगा। भगवान शिवशंकर के धनुष के खण्डन की आवाज़ सुनकर पहुँचे परशुराम के क्रोध को देखकर सभी भयभीत हो गये!लक्ष्मण जी द्वारा परशुराम के क्रोध का सामना किया गया, परशुराम और लक्षमण में हुए वाक युद्ध में दर्शक काफी रोमांचित हुए, दर्शकों द्वारा परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुये वीर रस और श्रंगार रस के वाक युद्ध के दौरान प्रांगण में तालियाँ गूँजती रही। भगवान राम के समक्ष अपने भाई की प्राणों की रक्षा हेतु किये गये करुण विलाप ने उपस्थिति जनमानस को करुण रस में डुबा दिया! मानव रूप में भगवान का अपने अनुज भाई के प्रति विलाप की स्थिति देख कर ऐसा अहसास नहीं रहा कि यह की यह लीला का मंचन हो रहा है!उपस्थित प्रबुद्ध जनमानस अश्रु पूरित हो उठा। रामलीला के आयोजक समित की ओर से एव लोगो द्वारा आरती की गयीं। आज के मंचन में रावण के रूप में अवधराम गुप्ता एव वाणासुर के रूप में सुबोध श्रीवास्तव के किरदार को खूब सराहा गया। मंच का संचालन श्यामा चरण गुप्ता द्वारा किया गया।
इस मौके पर रामलीला समिति के अध्यक्ष देवदत्त यादव, राम सरन जयसवाल, वेद प्रकाश वर्मा, बबलू वर्मा,सुबोध श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, कल्लूराम यादव, लल्लू यादव, मनमोहन सैनी, रामचन्द्र वर्मा, पुजारी वर्मा, सूरज यादव, सहित तमाम भक्तो ने आरती की।
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