मसौली बाराबंकी। मानव जीवन के लिए शिक्षा एव चिकित्सा बहुत जरूरी है वही अब शिक्षा एव चिकित्सा मानव सेवा न होकर गौरखधंधा बन चुका है। गांव गलियों मे खुलने वाले गंभीर बीमारियों के विषयज्ञ के बड़ी बड़ी होल्डिंग एव बोर्ड लगाकर झोलाछाप डॉक्टर मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे है। हद तो तब हो जाती है जब रुपयों को लेकर यह झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जान तक भी ले लेते है।
उल्लेखनीय हो कि वर्तमान समय मे शिक्षा और चिकित्सा का क्षेत्र समाज सेवा के बजाय व्यवसाय बन गया है और सेवा का भाव खत्म हो गया है। जिसका कारण है कि प्रशासनिक उदासीनता व अधिकारियों में इच्छा शक्ति की कमी हो गयी है और क्षेत्र मे झोलाछाप डॉक्टर्स की क्लीनिक कुकुरमुत्तों की तरह संचालित हो रही हैं। लेकिन इन पर किसी तरह से लगाम नहीं लग रही है। खास बात यह है कि कस्बा मसौली, बांसा, सफदरगंज, सैदनपुर, रसौली दर्जन भर से अधिक ऐसी क्लीनिक संचालित हो रही हैं, जहां डॉक्टर अपनी पैथी को छोड़ दूसरी पैथी में मरीजों का इलाज कर रहे हैं। लेकिन इनकी क्लीनिकों पर आज तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। क्लिनिको पर बड़ी बड़ी डिग्री के बोर्ड लगाकर जीवन से खिलवाड़ कर रहे है ।
जिसका जीता जागता उदाहरण शनिवार को उस समय देखने को मिला जब सफदरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम सदेवा मे पेट दर्द का इलाज कराने पहुंचे युवक की झोलाछाप डॉक्टर के कारण मौत हो गयी।
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