अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। पंडित मनीष कुमार तिवारी

अवधेश कुमार वर्मा संवाददाता बाराबंकी

मसौली बाराबंकी । व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए, अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है। अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। उक्त अमृत वाणी कस्बा जैदपुर स्थित भुइहारे बाबा मंदिर पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा आयोजन के पंचम दिवस पर श्रीमद भागवत कथा व्यास पंडित मनीष कुमार तिवारी के द्वारा कही गई । इसके अतिरिक्त व्यास तिवारी जी ने अपने मुखर बिंदु से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का बड़ा ही मनोरम प्रसंग सुनाया श्रीकृष्ण की जन्म कथा एवं बाल लीला का प्रसंग सुनकर पंडाल में मौजूद सभी भक्तगण भाव विभोर हो गए ।
कथा व्यास मनीष तिवारी ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के जन्म के बाद जब देवकी पुनः गर्भवती हुई, तो उन्हे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल भी पहुंच गए व्यास ने कहा कि “जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं” जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा।
श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमकर झूमे “श्रीकृष्ण जन्म उत्सव पर नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की” भजन प्रस्तुत किया तो श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर जमकर झूमे। एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्म की बधाईयां दी गई, एक-दूसरे को खिलौने और मिठाईयां बाटी गई। कथा महोत्सव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भजन प्रदुम करए भगवान श्री कृष्ण के जन्म की खुशियां मनाई। इस मौके पर कथा स्थल पर मौजूद भक्तों ने व्यासपीठ की पूजा आरती कर महाराज जी का आशीर्वाद लिया। अंत में अपने संदेश में कथा व्यास जी कहा कि हर एक सनातनी भक्त को चाहे वह स्त्री हो या पुरुष सब को श्रद्धा भाव से श्रीमद् भागवत कथा का रसपान अवश्य करना चाहिए ।

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