कोरोना की तबाही पर अमरीकी सेनेटर ने बयान किया अपना आभासः हम गिर रहे हैं, हम डूब रहें हैं और किसी को इस गहरे गढ़े की तह नहीं दिखाई दे रही है,

समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ

अमरीकी अख़बार न्यूयार्क टाइम्ज़ ने अपने संपादकीय में लिखा है कि हालिया कुछ हफ़्तों के भीतर अमरीकी अर्थ व्यवस्था को जो नुक़सान पहुंचा है वह बेहद विनाशकारी है।
इसके चलते देश भर में बेरोज़गारी की जो लहर उठी है उसका अमरीका के आधुनिक इतिहास में कोई उदाहरण नहीं है।
आंकड़ों से यह दहला देने वाली सच्चाई सामने आई है कि 45 साल से कम उम्र के अमरीकियों की आधी संख्या या तो बेरोज़गार हो गई या शिफ़्ट कम हो जाने के कारण उसकी आमदनी बहुत कम हो गई।
अख़बार ने ट्रम्प सरकार की बड़ी आलोचना की है कि उसने कोरोना के मामले में बड़ा ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैया अपनाया जबकि राज्यों के स्थानीय अधिकारियों ने अधिक ज़िम्मेदारी से काम किया। इसका नतीजा यह निकला कि दसियों लाख लोगों की जानें बच गईं।
कांग्रेस ने अर्थ व्यवस्था को सहारा देने और छोटी कंपनियों को डूबने से बचाने के लिए जो बजट पास किया है वह 346 अरब डालर का है और इससे लगता है कि कांग्रेस को यह आभास ही नहीं है कि कोरोना का संकट कितना बड़ा है क्योंकि इन कंपनियों को बचाने के लिए इसकी तीन गुना रक़म की ज़रूरत है।

अमरीका को देखना चाहिए कि फ़्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देश बेरोज़गारी को रोकने के लिए किस तरह कंपनियों की मदद कर रहे हैं ताकि वह अपने कर्मचारियों की तनख़्वाह दे सकें और दीवालिया होकर बंद न हो जाएं।
रिपब्लिकन सेनेटर जाश हावली ने एक प्रस्ताव पेश किया था जिसमें कहा गया था कि सरकार कंपनियों की यह मदद करे कि उनके कर्मचारियों की 80 प्रतिशत तनख़्वाह अदा करे।
मगर जो ज़रूरत है उसे और सरकार की ओर से की जाने वाली मदद को देखते हुए हम यह कहने पर मजबूर हैं कि हम गिर रहे हैं, हम डूब रहें हैं और किसी को इस गहरे गढ़े की तह नहीं दिखाई दे रही है।

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