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उड़ीसा

साहब ईमानदारी की खाता हूँ, सुकून है गिरे रुपए वापस कर पेश की ईमानदारी

बाराबंकी। साहब गरीब हूँ लेकिन फिर भी दिल से अमीर हूँ। खुदा जितना देता है उसमें सुकून है। मेहनत की खाता हूँ। शायद यही अल्लाह का करम…
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