जहाँ के राम वहाँ के तुलसी- डॉ सत्या सिंह

पत्रकार शमीम अंसारी: बाराबंकी एसएम न्यूज़ 24 टाइम्स 09 अगस्त 2025

आत्मकथ्य के आधार पर गोस्वामी तुलसीदास का जन्म सूकरक्षेत्र गोण्डा प्रतीत होता है- डॉ राम बहादुर मिश्र

बाराबंकी। अवध भारती संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा प्रकल्पित तुलसी जयंती श्रृंखला अंतर्गत वीणा सुधाकर ओझा महाविद्यालय मसौली में तुलसी जन्मभूमि विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई। मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ सत्या सिंह पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि जब तक राम हैं तबतक तुलसीदास जी, राम चरित मानस और अवधी की महत्ता और चर्चा रहेगी।
अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त डॉ राम बहादुर मिश्र अध्यक्ष अवध भारती संस्थान ने कहा कि जब कोई नाम बड़ा हो जाता है तो उसके साथ किंवदन्तियाँ जुड़ ही जाया करती हैं। तुलसीदास जी के साथ भी यही हुआ।
विशिष्ट अतिथि मानस मर्मज्ञ ओम मिश्र ओम ने राम चरित मानस से अनेक चौपाइयों के द्वारा सिद्ध किया कि लोकमंगल रामायण का मूल तत्व है।
लखनऊ से आये राष्ट्रीय प्रस्तावना के ब्यूरोचीफ पीयूष त्रिपाठी ने कहा कि राम चरित मानस संस्कारों का ग्रंथ है।
संयोजक प्रदीप सारंग ने कहा कि बाबा तुलसीदास से ज्यादा तिरस्कार और अपमान किसी साहित्यकार ने नहीं झेला है। इसके बावजूद लोकभाषा में रामचरित सृजित कर अवधी और रामचरित दोनों को आकाश तक पहुँचा गए। कविवर अजय प्रधान, कवि सोहन आजाद, कवि डॉ कुमार पुष्पेंद्र ने काव्यपाठ किया।
संगोष्ठी आयोजक डॉ दिनेश कुमार सिंह ने आरम्भ में अतिथि गण को शाल व स्मृतिचिन्ह प्रदान कर स्वागत किया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन एवं आभार प्रदर्शन करते हुए तुलसीदास जी के उपकार को न भुलाने वाला बताया।
संगोष्ठी में एड रजत बहादुर वर्मा, गुलज़ार बानो, अमरदीप, आराधना, गुलाम नबी, विष्णु, जितेंद्र जीशान अहमद, श्रेया सिंह पटेल, कविता जायसवाल सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।पत्रकार शमीम अंसारी: बाराबंकी  एसएम न्यूज़ 24 टाइम्स 09 अगस्त 2025

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