कड़े प्रतिबंधों में कैसे बनायी गयीं पनडुब्बियां? ईरानी पनडुब्बियां को जानें, एक एक क़दम परमाणु पनडुब्बी की ओर … इस लिए अमरीका कोशिश कर रहा है न खत्म हों ईरान पर हथियारों का प्रतिबंध!
समाचार एजेंसी न्यूज़ एसएम न्यूज़ के साथ
और जल्द ही उसका निर्माण कार्य आरंभ हो जाएगा।
युद्ध के दौरान पनडुब्बियों के प्रयोग के आरंभ से ही एक नया अध्याय शुरु हो गया क्योंकि पनडुब्बियों में सब से बड़ी विशेषता यह होती है कि वह समुद्र के तल में छुप सकती हैं जो युद्धपोत नहीं कर सकते। गत 100 वर्षों के दौरान पनडुब्बियों के निर्माण में बहुत अधिक तरक्की हुई है और आज के आधुनिक दौर में पनडुब्बी किसी भी देश के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण हथियार हो सकता है बीसवीं सदी के आरंभ होते ही परमाणु ईंधन से चलने वाली नयी प्रकार की पनडुब्बियां बनायी जाने लगीं। इस प्रकार की अत्याधुनिक पनडुब्बी को कभी बाहर से ईंधन लेने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती इस तरह वह हमेशा समुद्र में अपने मिशन में व्यस्त रह सकती है। कर सकते। गत 100 वर्शड़ी विशेषता यह होती है कि वह समुद्र के तल में छुप सकती हैं जो युद्धपोत नहीं कर सकते। गत 100 वर्श बैलेस्टिक मिसाइल के लैस यह पनडुब्बियों शीत युद्ध के दौरान शक्ति की प्रतीक थीं और पूर्व सोवियत संघ ने तो इसी प्रकार की एक पनडुब्बी से एक सेटेलाहट अंतरिक्ष में भी भेजा था। इस समय दुनिया के केवल छे देशों के पास परमाणु ईंधन से चलने वाली पनडुब्बी बनाने की तकनीक है लेकिन आम पनडुब्बी, एटमी फ्यूल से चलने वाली पनडुब्बियों की तुलना में कम आवाज़ करती है और ज़्यादा आसानी से छुप सकती है।

ईरान में पनडुब्बी का निर्माणईरान में पनडुब्बी निर्माण का फैसला सद्दाम द्वारा थोपे गये युद्ध के आरंभ में किया गया लेकिन बहुत प्रयास के बाद भी कोई सफलता नहीं मिली। शीत युद्ध के खत्म होने के बाद ईरान ने रूस से तीन पनडुब्बी खरीदी जो 90 के दशक में ईरान को दी गयी। यह ” किलो” मॉडल की पनडुब्बियां थीं जिन्हें दुनिया में सब से अच्छी पनडुब्बी माना जाता है उसके बाद धीरे धीरे ईरानी इंजीनियरों का प्रयास रंग लाया और ईरान ने ” तारिक़” नाम की पहली पनडुब्बी बनाने में सफलता प्राप्त कर ली। इस पनडुब्बी के अधिकांश पुर्ज़ों को देश के भीतर तैयार किया गया विशेषकर उसकी बैटरी का देश में निर्माण महत्वपूर्ण था क्योंकि बैटरी ही पनडुब्बी के अभियान की समय सीमा का निर्धारण करती है। ईरान की बनायी हुई पनडुब्बी से समुद्र के तल से युद्धपोत भेदने वाली क्रूज़ मिसाइल फायर किये जा सकते हैं।

ईरान की ज़रूरत इस प्रकार की पनडुब्बी से अधिक थी। फार्स की खाड़ी की गहरायी और हुरमुज़ स्ट्रेट की परिस्थितियों के लिहाज़ से ईरान को खास किस्म की पनडुब्बी की ज़रूरत महसूस हुई और फिर रक्षा मंत्रालय और युनिवर्सिटियों के सहयोग से परियोजना पर काम आंरभ हुआ।ईरान ने नहंग नामक *पनडुब्बी के निर्माण प्राप्त अनुभवों से लाभ उठाते हुए ” गदीर ” नामक पनडुब्बी का निर्माण आंरभ किया और फिर उसके कई मॉडल एक के बाद एक बनाए गये। गदीर पनडुब्बी खास तौर पर फार्स की खाड़ी के लिए बनायी गयी है इस लिए वह इस समुद्र में बेहद उपयोगी है। ईरान ने इसे बनाते समय ओमान सागर के मौसम को भी नज़र में रखा है। 29 मीटर लंबी यह पनडुब्बी 115 टन बोझ उठा सकती है और जब वह समुद्र तल में होती है तो राडार उसका पता नहीं लगा सकते।

